जेसीएम की स्थायी समिति की बैठक
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गैर-व्यवहार्य वेतनमान के विलय की मांग
8वीं सीपीसी को गैर-व्यवहार्य वेतनमान जैसे लेवल-1 को लेवल-2 के साथ और लेवल-3 को लेवल-4 और लेवल-5 को लेवल-6 के साथ विलय करने पर विचार करना चाहिए। एमएसीपी योजना में मौजूदा विसंगतियों पर विचार करना और पदोन्नति पदानुक्रम में बहुत परिभाषित पदानुक्रमित संरचना और एमएसीपी के साथ सेवा में न्यूनतम 5 पदोन्नति की सिफारिश करना, इसे भी संदर्भ की शर्तों में शामिल करें।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तुरंत मंजूर की जाने वाली अंतरिम राहत का निर्धारण, इस पर विचार किया जाए। वेतन और पेंशन के साथ विलय किए जाने वाले महंगाई भत्ते/महंगाई राहत का प्रतिशत, तुरंत निर्धारित हो। 7वीं सीपीसी की विभिन्न विसंगतियों को निपटाने के लिए, जिन्हें कर्मचारी पक्ष द्वारा विसंगति समिति की बैठकों और जेसीएम बैठकों में उठाया गया था, संदर्भ शर्तों में इनके समाधान पर विचार किया जाए। जेसीएम सदस्यों ने इसे जरूरी विषय बताया है।
पेंशन, मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति, ग्रेच्युटी, पारिवारिक पेंशन, 12 साल के बाद पेंशन के परिवर्तित हिस्से की बहाली, हर पांच साल के बाद पेंशन में वृद्धि के लिए संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को लागू करना, इसे भी संदर्भ शर्तों के लिए भेजा गया है। मौजूदा सेवानिवृत्ति लाभों में आवश्यक सुधार करना, अतीत व भविष्य के पेंशनभोगियों के बीच समानता, यह सुझाव भी भेजा गया है। एक जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सीसीएस (पेंशन नियम) 1972 (अब 2021) के तहत परिभाषित और गैर अंशदायी पेंशन योजना की समीक्षा करना और उसे बहाल करना, डीओपीटी सचिव के समक्ष यह सुझाव भी रखा गया है।
सीजीएचएस से संबंधित मामलों को लेकर एफएमए की संसदीय स्थायी समिति की सिफारिश करना और डाक पेंशनभोगियों सहित कर्मचारियों व पेंशनभोगियों को कैशलेस/परेशानी मुक्त चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के तरीकों की सिफारिश करना, इन्हें भी संदर्भ शर्तों में शामिल किया जाए। स्नातकोत्तर स्तर तक बाल शिक्षा भत्ता और छात्रावास सब्सिडी की समीक्षा व अनुशंसा करना। ऐसे अग्रिमों की समीक्षा करना और उन्हें शुरू करने की सिफारिश करना, जो वर्तमान परिस्थिति में आवश्यक हैं और साथ ही जो अग्रिम समाप्त कर दिए गए हैं, उन्हें बहाल करना, उक्त बातों को भी आठवें वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों में शामिल किया जाए।
365 दिन में चौबीसों घंटे काम करने वाले रेलवे कर्मचारियों के कर्तव्यों की प्रकृति में शामिल जोखिम और कठिनाई को ध्यान में रखते हुए, भारतीय रेलवे में सभी श्रेणियों के कर्मचारियों को जोखिम और कठिनाई भत्ते के भुगतान पर विचार करना। अत्यधिक, बारहमासी, जोखिम भरी और खतरनाक कामकाजी परिस्थितियों पर विचार करना, जिसके तहत रक्षा नागरिक कर्मचारी हथियारों, गोला-बारूद, रसायन, विस्फोटक और एसिड आदि के निर्माण व इसके भंडारण में शामिल होते हैं, इनके लिए एक विशेष जोखिम भत्ता, बीमा कवरेज की सिफारिश करना, मुआवजा आदि, ये भी संदर्भ शर्तों का हिस्सा बनें।
जेसीएम के सदस्य और एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, सभी श्रेणी के कर्मचारियों के लिए कम से कम पांच पदोन्नति होनी चाहिए। रक्षा विभाग के सिविलियन कर्मचारी बहुत जोखिम भरे हालात में काम कर रहे हैं। आयुध निर्माणियों में आकस्मिक हादसे होते हैं। निगमीकरण के बाद कर्मचारियों के कल्याण की परिभाषा बदल रही है। काम के दौरान होने वाले हादसों में जान खोने या घायल कर्मियों को बेहतर इलाज और मुआवजे की जरुरत है। वे लोग जोखिम के विशेष कवरेज के पात्र हैं।
सीपीसी को इस बाबत अध्ययन करने की आवश्यकता है। एमओडी द्वारा जोखिम भत्ता समिति का गठन किया गया था। एनसी-जेसीएम की स्थायी समिति द्वारा बार-बार आग्रह करने के बावजूद यह काम नहीं कर रही है। अभ्यावेदन बैठकें नहीं बुलाई जातीं। समाप्त किए गए फेस्टिवल एडवांस एवं अन्य एडवांस बहाल किए जाएं। मूल वेतन के साथ 50% डीए और पेंशन के साथ 50% डीआर का विलय हो। सचिव डीओपीटी ने, कर्मचारी पक्ष को भरोसा दिलाया है कि स्टाफ द्वारा संदर्भ की शर्तों पर जो बातें कही गई हैं, उन पर विचार किया जाएगा। यह भी आश्वासन दिया गया कि कर्मचारी पक्ष के साथ आगे की बैठक उचित समय पर होगी।