अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव और स्टाफ साइड की जेसीएम के वरिष्ठ सदस्य सी. श्रीकुमार ने बताया कि कर्मचारी, अखिल भारतीय विरोध दिवस मनाने पर मजबूर हैं। केंद्र सरकार, कर्मियों की बात नहीं सुन रही। केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और राज्य सरकार के कर्मचारी, 8वें वेतन आयोग के गठन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन भारत सरकार चुप है। इससे सरकारी कर्मियों में व्यापक असंतोष फैल रहा है। कर्मचारियों का तर्क है कि जहां सांसदों और विधायकों को समय-समय पर वेतन संशोधन मिलता है, वहीं सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी, बढ़ती मुद्रास्फीति और स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा की बढ़ती लागत के बावजूद, एक दशक से भी अधिक समय से उचित संशोधन के बिना संघर्ष कर रहे हैं।
ये हैं एआईडीईएफ की तीन प्रमुख मांगें
आठवें वेतन आयोग की अधिसूचना का तत्काल प्रकाशन किया जाए। सरकार ने 16 जनवरी, 2025 को आठवें वेतन आयोग के गठन के अपने निर्णय की घोषणा की और राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के कर्मचारी पक्ष से संदर्भ की शर्तों (टीओआर) का मसौदा मांगा था। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के साथ चर्चा के बावजूद, आठ महीने बाद भी कोई वेतन आयोग को लेकर अधिसूचना जारी नहीं की गई है। बतौर श्रीकुमार, चूंकि सीपीसी की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से लागू होनी हैं, इसलिए एआईडीईएफ केंद्र सरकार के कर्मचारियों, रक्षा कर्मचारियों, रेलवे, सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक कर्मियों के वेतन संशोधन में देरी से बचने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग करता है।