अमरनाथ यात्रा के रूट पर तैनात 'सीआरपीएफ' की 220 कंपनियां तैनात
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की सर्वाधिक कंपनियां, अमरनाथ यात्रा के रूट पर तैनात रहेंगी। लगभग 220 कंपनियों को वहां तैनात किया गया है। हालांकि 100 से अधिक कंपनियां, पहले से ही जेएंडके में तैनात हैं। डीजी सीआरपीएफ जीपी सिंह ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को लेकर रेंज डीआईजी और कमांडिंग अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उन्होंने यात्रा रूट का भी जायजा लिया। बीएसएफ डीजी दलजीत चौधरी भी जम्मू कश्मीर में पहुंचे थे। उन्होंने भी यात्रा मार्ग को फुलप्रूफ सिक्योर करने की रणनीति तैयार की थी। बीएसएफ की करीब 143 कंपनियों को यात्रा की सुरक्षा में लगाया गया है। एसएसबी की 97 कंपनियां और आईटीबीपी की 62 कंपनियां, यात्रा रूट के विभिन्न हिस्सों पर तैनात होंगी। सीआईएसएफ की लगभग 60 कंपनियों को लगाया गया है। सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के जवान भी यात्रा रूट की हिफाजत कर रहे हैं।
सभी केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के खुफिया तंत्र का आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर 'मैक' के साथ त्वरित तालमेल सुनिश्चित किया गया है। ऐसे खुफिया अलर्ट मिल रहे हैं, कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए यात्रा रूट बम गिराने की हरकत हो सकती है। इसके अलावा छोटी मिसाइल यानी हैंड ग्रेनेड से हमला भी संभावित है। फिदायीन अटैक, आईईडी और चिपकने वाला बम, ये भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस की इंटेलिजेंस विंग और सुरक्षाबलों की मदद से ओवर ग्राउंड वर्कर की सक्रियता का पता लगाने के लिए एक विशेष दस्ते का गठन किया गया है। ये ओवर ग्राउंड वर्कर, आतंकियों को जरुरी सूचनाएं एवं ट्रांसपोर्ट की सुविधा मुहैया कराते हैं। सूत्रों ने बताया, पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के जम्मू कश्मीर में मौजूद मुखौटे आतंकी संगठन जैसे 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) और पीएएफएफ की गतिविधियों पर खास नजर रखी जा रही है। जम्मू कश्मीर में ये आतंकी संगठन, ओवर ग्राउंड वर्कर की मदद से हमले को अंजाम देते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बलों अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी सूरत में आतंकियों की बुरी नजर 'अमरनाथ यात्रा' पर न पड़े। यात्रा के लिए वाहन, ठहराव शिविर, रास्ते में लैंड स्लाइडिंग से मार्ग बाधित होना और आतंकियों से यात्रा की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यात्रियों को कैंप तक सुरक्षित ले जाने के लिए टनल और ओवरहेड ब्रिज सुविधाएं, आदि मुहैया कराई जाएंगी। वाहनों पर चिपकने वाले बम का इस्तेमाल तीन चार वर्ष पहले ही शुरु हुआ है। इस बार केंद्रीय सुरक्षा बलों एवं जेकेपी ने आतंकियों और उनके 'अंडर ग्राउंड वर्कर' को उनके ठिकानों पर ही दबोचने की रणनीति बनाई है।
सुरक्षा बलों ने चिपकने वाले बम से रसद वाहनों को बचाने का प्लान बनाया है। अमरनाथ यात्रा के दौरान टारगेट किलिंग को रोकना सुरक्षा बलों की प्राथमिकता रहेगी। रसद सामग्री वाले स्थानों पर ड्रोन के जरिए नजर रखी जाएगी। यात्रियों के शिविरों पर हमला न हो, इसके लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा रहेगा। यात्रा में शामिल वाहनों को ऐसे स्केनर से गुजारा जाए, जहां पर किसी भी संदिग्ध वस्तु की पहचान की जा सकती है। आईईडी का पता लगाने के लिए सुरक्षा बलों की कई टीमों का गठन किया गया है। उपकरणों के अलावा खोजी कुत्ते भी इस काम में सुरक्षा बलों की मदद करेंगे। ड्रोन को मार गिराने के लिए सुरक्षा बलों के शूटर तैनात होंगे। आईईडी का पता लगाने के लिए अनेक जगहों पर तकनीकी उपकरण लगाए जा रहे हैं।