प्रदूषण को लेकर उद्योग गंभीर नहीं हैं। यमुना के किनारे स्थित करीब 80 फीसदी उद्योगों ने अभी तक प्रदूषण की ऑनलाइन निगरानी के लिए तैयार प्रणाली ओसीईएमएस को नहीं लगाया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यमुना किनारे बसे 1,631 उद्योगों में से महज 285 में ही ओसीईएमएस सिस्टम लगाया गया है। प्रदूषण फैलाने वाले 1,346 उद्योगों ने अभी तक ऑनलाइन निगरानी प्रणाली ओसीईएमएस को नहीं लगाया है।
ओसीईएमएस को दरअसल सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सर्वर से जोड़ा जाता है और प्रदूषण के आंकडे़ ऑनलाइन इकट्ठे किए जाते हैं। अभी तक इस प्रणाली को लागू नहीं करने वाले उद्योगों में हरियाणा के 661, उत्तर प्रदेश के 419, दिल्ली के 265 और उत्तराखंड का एक उद्योग है। सीपीसीबी ने संबंधित राज्य प्रशासनों से तीन महीने के भीतर सभी उद्योगों में ओसीईएमएस प्रणाली शुरू करने और उन्हें सीपीसीबी के सर्वर से जोड़ने को कहा है।
गौरतलब है कि ऊर्जा, फार्मास्युटिकल, फर्टिलाइजर, रिफाइनरी, चीनी, कपड़ा, चमड़ा से जुड़े इन उद्योगों से भारी मात्रा में प्रदूषित कचरा निकलता है। ये उद्योग निर्धारित मात्रा से अधिक प्रदूषण ना फैलाएं इसके लिए ही ओसीईएमएस प्रणाली शुरू किया गया है, जिसके तहत कंपनी से निकलने वाले कचरों का ऑनलाइन डेटा सीपीसीबी के सर्वर पर पहुंचेगा। 2015 से ही उद्योगों के लिए ओसीईएमएस लगाना आवश्यक किया गया था।
क्या है ओसीईएमएस
ऑनलाइन कॉन्टिन्युअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीईएमएस) एक ऐसी ऑनलाइन प्रणाली है जो सीधे सीपीसीबी के सर्वर से जुड़ी होती है। उद्योगों से निकलने वाले कचरे और वायु प्रदूषण के आंकड़े सीधे सीपीसीबी सर्वर पर स्टोर होते हैं और सीपीसीबी उसके अनुसार ही कार्रवाई करता है।