भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरे होने के अवसर पर संसद के विशेष चर्चा सत्र में सरकार की बड़ी फजीहत होने से बच गई। राज्यसभा में चर्चा के प्रस्ताव के लिए बीएसी की बैठक में सरकार की ओर से जो प्रस्ताव बांटा गया था, उसमें आंदोलन के नायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम नहीं था।
बैठक में शामिल विपक्ष के सदस्यों की ओर से जब गांधी के नाम गायब होने की चर्चा उठी तो संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्त्तार अब्बास नकवी को गलती का अहसास हुआ। इस बीच बैठक में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा भी अपनी ओर से प्रस्ताव का एक मसौदा लेकर पहुंचे थे। जिसमें गांधी समेत आजादी के तमाम पहलूओं को शामिल किया गया था।
बैठक में शामिल सदस्यों के आग्रह पर नकवी ने शर्मा से प्रस्ताव दिखाने को कहा, तो शर्मा ने अपने प्रस्ताव के मसौदे को सबके सामने रखा। जिसे सभी ने स्वीकार किया मजबूरी में नकवी ने भी कांग्रेस के प्रस्ताव को स्वीकार कर सरकार को बड़ी फजिहत झेलने से बचा लिया।
सरकार के प्रस्ताव में था महज पीएम मोदी के कार्यों का उल्लेख
दरअसल, दोनों सदनों के शुरू होने से पहले बीएसी की बैठक होती है। हमेशा की तरह बुधवार को भी तय समय पर राज्यसभा के बीएसी कमेटी की बैठक थी। बैठक में शामिल एक सांसद के अनुसार बीएसी की बैठक में भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरे होने के अवसर पर सदन के जरिए अपनाए जाने वाले चर्चा प्रस्ताव का प्रारूप लेकर आए संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्त्तार अब्बास नकवी पहुंचे थे। लेकिन उनके प्रस्ताव में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम नहीं था। उसमें केवल केंद्र सरकार के तमाम अभियानों समेत भ्रष्टाचार के मुद्दे का जिक्र था।
इसपर जब सांसदों ने नकवी का ध्यान आकर्षित किया तो वे बगलें झांकने लगे। अब प्रस्ताव का प्रारूप आनन-फानन में कैसे और क्या बनाया जाए। इसको लेकर चर्चा शुरू हुई। इतने में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि वे एक प्रस्ताव का प्रारूप लेकर आए हैं। सदस्यों ने उनसे प्रारूप सामने करने को कहा, जब उन्होंने प्रारूप पढकर सुनाई तो अधिकांश सांसदों ने उसपर सहमति जताई।
अब प्रारूप को तय करने का जिम्मा बैठक में सरकार की नुमाइंदगी करने का जिम्मा सरकार के संसदीय कार्य मंत्री पर था। नकवी ने थोड़े समय का वक्त मांगा। सूत्र बताते हैं कि वे शर्मा के प्रस्ताव का प्रारूप लेकर अपने दल के किसी बड़े नेता के पास दिखाने के लिए लेकर गए। थोड़ी देर में ही नकवी प्रस्ताव के प्रारूप को लेकर वापस लौटे और उन्होंने शर्मा के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी। जिसे बाद में राज्यसभा में पढ़ा गया और सभी नेता उसी के इर्द—गिर्द भाषण देते नजर आए।
संसद में सरकार के फ्लोर मैनेजरों की खुली कलई
बैठक में शामिल एक वरिष्ठ राज्यसभा सांसद के अनुसार पीएम मोदी के तमाम नसीहतों के बावजूद भी संसद में सरकार के फ्लोर मैनेजर लगातार विफल होते दिख रहे हैं। बुधवार को विशेष चर्चा प्रस्ताव के प्रारूप में गांधी का नाम न होने से सरकार की कलई खुलते-खुलते बची।
वह तो कांग्रेस नेता आनंद शर्मा थे जो पूरी तैयारी के साथ अपना प्रस्ताव बनाकर लाए थे। लेकिन यह बात सामने है कि राज्यसभा में तो सरकार की कलई खुलते-खुलते बची। मगर लोकसभा की चर्चा में पीएम मोदी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाम का जिक्र न कर विरोधियों को निशाना साधने का मौका थमा दिया है। अगर राज्यसभा की बीएसी बैठक में विपक्ष के सांसद सजग न होते तो चर्चा प्रस्ताव के मूल में ही उस गांधी का नाम गायब था जोकि भारत छोड़ो आंदोलन के नायक थे।