देश के कई राज्यों में कोरोना संक्रमण अभी भी गंभीर बना हुआ है। केरल के नौ जिलों में संक्रमण दर 10 फीसदी अधिक है जिसके चलते पूरे देश में सबसे ज्यादा मामले भी यहीं रोजाना मिल रहे हैं। यह स्थिति तब है जब केरल में 45 वर्ष की आयु पार 73 फीसदी लोग कम से कम एक खुराक ले चुके हैं।
जबकि इसी आयुवर्ग की 30 फीसदी आबादी दोनों खुराक लेकर टीकाकरण पूरा कर चुकी है। इतना ही नहीं स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्करों को लेकर स्थिति देखें तो केरल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां इन दोनों वर्गों का पहली खुराक को लेकर शत फीसदी टीकाकरण हो चुका है।
जबकि 81 फीसदी कर्मचारी दोनों खुराक लेकर टीकाकरण पूरा कर चुके हैं। राज्य सरकार के अनुसार, 45 फीसदी युवाओं का एकल और 17 फीसदी ने दोनों खुराक लेकर टीकाकरण पूरा कर लिया है।
टीकाकरण के बाद भी कोरोना के मामले बढ़ने को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि केरल ने टीकाकरण को लेकर काफी अच्छा काम किया है लेकिन डेल्टा वैरिएंट की वजह से संक्रमण देखने को मिल रहा है।
हालांकि टीकाकरण अधिक होने का लाभ यह है कि मौत के आंकड़ों में कमी आ रही है और अस्पतालों में भर्ती होने की संख्या भी कम है। यहां स्थिति देख साफ पता चलता है कि टीकाकरण के बाद भी लोग संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए दोनों खुराक लेने के बाद भी लोगों को कोविड सतर्कता नियमों का पालन करना है।
बता दें कि केरल के त्रिशूर स्थित सरकारी मेडिकल अस्पताल के कम से कम 39 छात्र कोविड-19 से संक्रमित पाए गए हैं जिन्हें कोविड-19 रोधी टीके की दोनों खुराक दी जा चुकी थी। यह जानकारी अस्पताल के अधिकारियों ने सोमवार को दी।
कोविड-19 महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के कारण बंद मेडिकल कॉलेज को एक जून को फिर से खोल दिया गया था और छात्रों का पहला बैच पांच जून को परिसर में वापस आया था।
अधिकारियों ने कहा कि 175 छात्रों का दूसरा बैच छह जून को आया था, जिनमें से उसी दिन कोविड-19 के पहले मामले की पुष्टि हुई थी। जब मामले बढ़ने लगे, तो अधिकारियों ने 17 जुलाई को उस बैच के सभी छात्रों की कोविड-19 जांच कराई। उनमें से 20 के वायरस से संक्रमित पाए जाने पर उन्हें घर जाने की अनुमति दी गई।