भारत की हरनाज कौर संधू के 70वीं मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम करने से देश भर में खुशी का माहौल है। 21 साल बाद भारत के खाते में यह उपलब्धि आई है। हरनाज को यह खिताब जीतने के लिए देश-दुनिया से ढ़ेरों बधाईयां मिल रही हैं, लेकिन इस प्रतियोगिता का आयोजन इस्राइल के एलात में होने के कारण सबसे ज्यादा बधाई संदेश उन्हें इस्राइल से ही मिल रहे हैं। इस्राइली विदेश मंत्रालय की लोरेना खतीब ने मिस यूनिवर्स का ताज पहने हरनाज की एक तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया। उसके बाद कई लोग इस जीत में भारत- इस्राइल के बीच दोस्ती के कनेक्शन को तलाशने लगे।
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भारत-इजरायल संबंधों के जानकार लीडेन विश्वविधालय (नीदरलैंड्स) में एसोसिएट प्रोफेसर निकोलस ब्लारेल से इस बारे में सवाल पूछे जाने लगे। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि उनसे मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में इस्राइल कनेक्शन को लेकर सवाल पूछे जाएंगे। उन्होंने आगे कहा ‘मुझे नहीं लगता कि भारत और इस्राइल के बीच बेहतर रणनीतिक संबंधों का परिणाम से कोई लेना-देना था! हालांकि, आप जानते हैं कि संयोग के बारे में क्या कहा जा सकता है।
जाहिर है निकोलस ब्लारेल के इस ट्वीट ने यह तो साफ कर दिया कि हरनाम संधु के मिस यूनिवर्स का ताज हासिल करने में भारत- इस्राइल के बीच दोस्ती का कोई कनेक्शन नहीं है, लेकिन फिर भी इस बात ने यह उत्सकुता तो जगा दी है जिस देश में भारत की हरनाम सिंधु ने मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया है उसके साथ भारत के कूटनीतिक रिश्ते कैसे हैं।
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इजरायल के पीएम नफ्ताली बेनेट
- फोटो : Social media
भारत-इजरायल संबंधों के कुछ प्रमुख बिंदुओं पर एक नजर डालिए।
भारत ने आधिकारिक तौर पर इस्राइल 1950 में को मान्यता दी। दोनों देशों ने 29 जनवरी, 1992 को पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए। दिसंबर 2020 तक, भारत संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के 164 सदस्य देशों में से है, जिनके इस्राइल के साथ राजनयिक संबंध हैं।
इस्राइल के दूसरे सबसे बड़े शहर तेल अवीव में भारत का दूतावास है वहीं इस्राइल का भारत में दिल्ली में दूतावास है। इसके मुंबई और बेंगलुरु में वाणिज्य दूतावास भी हैं।
1997 में, एजर वीजमैन भारत की यात्रा करने वाले इस्राइल के पहले राष्ट्रपति बने। 2000 में, तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी इस्राइल की यात्रा पर गए। इस यात्रा पर जाने वाले वे पहले भारतीय मंत्री थे। उसी वर्ष, जसवंत सिंह इस देश का दौरा करने वाले भारत के पहले विदेश मंत्री बने। एरियल शेरोन 2003 में भारत आने वाले पहले इस्राइली प्रधानमंत्री थे।
पीएम मोदी जुलाई 2017 में इस्राइल गए थे। वहीं इस्राइल के पूर्व बेंजामिन नेतन्याहू जनवरी 2018 में भारत आए। उनके आगमन पर पीएम मोदी ने हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत रूप से उनका स्वागत करने के लिए प्रोटोकॉल तोड़ा। नेतन्याहू ने भी 2017 में व्यक्तिगत रूप से मोदी की अगवानी की थी।
भारत इस्राइल से सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा खरीदार है। वहीं रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। भारत इस्राइल का दसवां सबसे बड़ा व्यापार भागीदार और एशिया का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपने कई लेखों में कहा है कि मोदी सरकार और इस्राइल सरकार के बीच रणनीतिक, सैन्य और वैचारिक संबंध मजबूत हो रहे हैं। रोस्किल्डे विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय विकास अध्ययन के एसोसिएट प्रोफेसर सोमदीप सेन ने सितंबर में इस्राइल स्पाइवेयर पेगासस विवाद के संदर्भ में अलजजीरा के लिए लिखे एक लेख में भारत और इस्राइल मजबूत रणनीतिक, सैन्य और प्रौद्योगिकी साझेदारी विकसित की है। आज भारत और इस्राइल के बीच द्विपक्षीय संबंध बहुआयामी हैं। अप्रैल 2020 और फरवरी 2021 के बीच, द्विपक्षीय व्यापार (रक्षा को छोड़कर) 4.14 बिलियन डॉलर का रहा।