द्रौपदी अम्मन की मूर्ति (फाइल फोटो)
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तमिलनाडु के मदुरै में एक आश्चर्यजनक मामला सामने आया है। यहां मेलुर के एक मंदिर से 1915 से गायब हुई एक मूर्ति दीवार के अंदर से बरामद हुई है। इसे कथित तौर पर करुप्पासामी ने चुरा लिया था। वह मंदिर के दो पुजारियों में से एक थे। पुलिस ने रविवार को डेढ़ फीट लंबी द्रौपदी अम्मन की मूर्ति को बरामद कर लिया और इसे मंदिर प्रशासन को सौंप दिया।
यह मूर्ति सालाना उत्सव से एक दिन पहले मिली है। माना जाता है कि नगाईकडाई स्ट्रीट में स्थित यह मंदिर 800 साल पुराना है। करुप्पासामी के 60 साल के पोते मुरुगेसन ने परिवार की इस गुप्त जानकारी के बारे में मंदिर में दर्शन करने के छह महीने बाद बताया। मुरुगेसन नमक्कल में रहते हैं और उनका मानना है कि देवी के क्रोध के कारण उनके बहुत सारे रिश्तेदारों की मौत हो गई और उनकी तबियत भी खराब रहती है।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, 'मुरुगेसन ने मंदिर के पुजारी नारायण को बताया कि उसने बचपन में अपने पिता और दादा को पैतृक घर में दीवार की पूजा करते हुए देखा है।' पुलिस अधिकारी ने बताया कि करुप्पासामी दूसरे पुजारी के साथ झगड़ा होने के बाद मूर्ति को लेकर चले गए थे। हालांकि उस समय ब्रिटिश पुलिस में इसे लेकर मामला दर्ज कराया गया था और जांच हुई थी। मगर वह इस मामले को सुलझाने में असफल रहे थे।
करुप्पासामी ने दीवार खोदी और मूर्ति को उसके अंदर रख दिया और उसके बाद बाहर से प्लास्टर करवा दिया। पुलिस उप अधीक्षक वी मलायसामी ने कहा कि जब से मुरुगेसन ने सच्चाई बताई तभी से गांववाले अपनी देवी को वापस लाने के लिए दौड़ने लगे। गांववालों और पुलिस को शुरुआत में थोड़ी सी हिचक हुई क्योंकि यह घर अब किसी और का था।
पुलिस ने कहा, 'लिखित शिकायत मिलने के बाद ही हमने आगे कदम बढ़ाने का निर्णय लिया। घर के मालिक मचाकलाई को दीवार तोड़ने में कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि वह खुद इस घर को तोड़ने की योजना बना रहे थे। जहां मुरुगेसन ने बताया था वहीं से मूर्ति बरामद हुई।'