फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीएसएफ के 674 'कुत्तों' का कमाल: सीमा पर हरकत करने वालों को घर जाकर पकड़ लेते हैं!

सार

बीएसएफ के डीजी पंकज सिंह ने बताया, बॉर्डर का कुछ एरिया ऐसा है, जहां कई बार धुंध इतनी ज्यादा होती है कि उसमें दस मीटर दूर की वस्तु को देखना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में सुरक्षा घेरा टूट सकता है। इसका तोड़ निकालने के लिए कुत्तों की मदद ली गई और इन्होंने शानदार काम किया है...
विज्ञापन
राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण संस्थान - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' के 674 खोजी कुत्तों ने बॉर्डर सर्विलांस के लिए लगे करोड़ों रुपये के तकनीकी उपकरणों को मात दे दी है। घना जंगल हो, दलदल हो या ऐसी धुंध, जिसमें दस मीटर तक भी कुछ दिखाई नहीं पड़ता, वहां पर ये खोजी कुत्ते, कारगर साबित हो रहे हैं। बॉर्डर सर्विलांस से जुड़े कई मामले तो ऐसे रहे हैं, जहां पर इन कुत्तों ने कई किलोमीटर पीछे जाकर 'तस्कर या घुसपैठिये' को पकड़वाने में मदद की है। अगर किसी तस्कर का कोई भी सामान जैसे रुमाल, गमछा, चप्पल, माचिस या लाइटर आदि बॉर्डर पर रह जाता है, तो ये खोजी कुत्ते दो तीन किलोमीटर के दायरे में आरोपी को तलाश कर लेते हैं। सूंघने की शक्ति के बल पर ये कुत्ते आरोपी के घर के बाहर जाकर बैठ जाते हैं। उसके बाद सुरक्षा एजेंसियां समझ जाती हैं कि आरोपी यहीं पर रहता है। पुलिस जब पूछताछ करती है तो मामला सही निकलता है।

ऐसी जगहों पर खोजी कुत्ते मददगार साबित होते हैं

बीएसएफ के डीजी पंकज सिंह ने बताया, बॉर्डर का कुछ एरिया ऐसा है, जहां पर फेंसिंग संभव नहीं है। पहाड़ है, दलदल है या नदी नाला है, यहां घुसपैठ रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। बॉर्डर पर सर्विलांस के लिए तकनीकी उपकरण लगाए जा रहे हैं। स्मार्ट फेंसिंग के अंतर्गत सीसीटीवी कैमरा, बुलेट कैमरा, व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस), सर्विलांस ड्रोन और दूसरे तकनीकी उपकरण शामिल हैं। कई बार धुंध इतनी ज्यादा होती है कि उसमें दस मीटर दूर की वस्तु को देखना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में सुरक्षा घेरा टूट सकता है। इसका तोड़ निकालने के लिए कुत्तों की मदद ली गई। बतौर पंकज सिंह, कुत्तों ने शानदार काम किया है। किसी भी तरह का मौसम हो, ये खोजी कुत्ते तस्कर, घुसपैठिये या दूसरे आपराधिक तत्वों को पकड़वाने में मददगार साबित हुए हैं।

आरोपी के घर तक पहुंच रहे हैं बीएसएफ के खोजी कुत्ते

बीएसएफ के खोजी कुत्ते आरोपी के घर तक पहुंच जाते हैं। बॉर्डर पर तस्करी का प्रयास करने वाले लोगों का अगर कोई भी सामान छूट गया है तो ये कुत्ते उनका ठिकाना तलाश लेते हैं। डीजी पंकज सिंह बताते हैं कि पंजाब में एक तस्कर का कपड़ा बॉर्डर के निकट छूट गया था। वह सीमावर्ती इलाके में रहता था। खोजी कुत्ते ने उस कपड़े को सूंघ कर दो-तीन किलोमीटर दूर स्थित गांव में तस्कर का घर ढूंढ लिया। वह कुत्ता, तस्कर के घर के बाहर बैठ गया। इसके बाद पूछताछ शुjt हुई। मामला सही निकला।

विज्ञापन


ऐसे कई करीब दर्जनभर मामले खोजी कुत्तों की मदद से सुलझाए गए हैं। खोजी कुत्ते का बड़ा फायदा यह रहता है कि इनकी मदद से खराब मौसम जैसे आंधी तूफान, बरसात, धुंध व बर्फबारी में बॉर्डर पर संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है। लाइव रिकॉर्डिंग के लिए खोजी कुत्तों के गले में कैमरा भी लगाया जाता है। कैमरे के जरिए साफ वीडियो बने, इसके लिए कुत्ते को कहां कैसे खड़ा होना, किस दिशा में कितना घूमना है, आदि की ट्रेनिंग दी जाती है।

ग्वालियर स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण संस्थान में होती है ट्रेनिंग

बीएसएफ के ग्वालियर स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण संस्थान में विभिन्न नस्लों के कुत्तों को ट्रेनिंग दी जाती है। इनमें जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर, गोल्डन रीट्रिवर, डाबरमैन पिंसचर, क्रोकर स्पेनियल और बेल्जियन मेलेनोइस आदि शामिल हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश बॉर्डर पर इन्हीं कुत्तों को लगाया गया है। ये जवानों के साथ गश्त करते हैं। इन्हें विस्फोटक सामग्री से लेकर किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु की पहचान करना सिखाया जाता है। राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण संस्थान में कुत्तों को तीन सप्ताह से लेकर 36 सप्ताह तक का प्रशिक्षण दिया जाता है। बीएसएफ द्वारा अभी तक नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, सेशल्स श्रीलंका, म्यांमार और मॉरीशस के कुत्तों को ट्रेनिंग दी गई है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें