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Defence: 'पहले होता था 70% आयात, अब देश में निर्मित हो रहे 65 फीसदी रक्षा उपकरण', रक्षा मंत्रालय का दावा

Wed, 26 Mar 2025 07:18 AM IST
निर्मल कांत ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

Defence: भारत अब 65% रक्षा उपकरण देश में ही बना रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता घटी है। 2023-24 में रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार ने 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये रक्षा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी। 
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रक्षा मंत्रालय - फोटो : Defence Ministry
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विस्तार
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सरकार ने मंगलवार को बताया कि अब 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही बन रहे हैं। जबकि पहले 65-70 प्रतिशत तक इनका आयात करना पड़ता था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मेक इन इंडिया पहल के बाद से रक्षा उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 2023-24 में यह रिकॉर्ड 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत के रक्षा निर्यात पोर्टफोलियो में अब बुलेटप्रूफ जैकेट, डोर्नियर विमान, चेतक हेलिकॉप्टर, फास्ट इंटरसेप्टर बोट और हल्के टॉरपीडो शामिल हैं। बिहार में बने जूते अब रूसी सेना में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यह भारत के उच्च विनिर्माण मानकों को इंगित करता है।

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रक्षा मंत्रालय ने कहा, पहले रक्षा क्षेत्र में देश विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर था। भारत अब स्वदेशी विनिर्माण में उभरती शक्ति बन गया है। अब न केवल सुरक्षा जरूरतों को पूरा किया जा रहा है, बल्कि आर्थिक विकास में योगदान देने वाली मजबूत रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। 24 मार्च को जारी फैक्ट शीट के अनुसार, भारत का 2029 तक लक्ष्य 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन है। मेक इन इंडिया ने धनुष तोप प्रणाली, उन्नत टोड आर्टिलरी गन, अर्जुन टैंक, तेजस विमान, आकाश मिसाइल और नौसैनिक संपत्तियों जैसे उन्नत सैन्य मंचों के विकास को संभव बनाया है। 

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5,516.16 करोड़ रुपये का एफडीआई आया
सितंबर 2020 में रक्षा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को उदार बनाया गया। इसके तहत स्वचालित मार्ग से 74 प्रतिशत तक और सरकारी मार्ग से 74 प्रतिशत से अधिक एफडीआई की अनुमति दी गई। अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2000 से रक्षा उद्योगों में कुल 5,516.16 करोड़ रुपये का एफडीआई आया। रक्षा बजट 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

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