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63 वर्षीय रिटायर्ड कर्मी बनेंगे निजी सलाहकार, केंद्रीय मंत्रियों की राह करेंगे आसान, संभालेंगे कई काम

Sun, 09 Aug 2020 06:45 PM IST
Rajeev Rai जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल (सांकेतिक)
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कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में बहुत सी नई कवायद देखने को मिल रही है। नए कर्मियों की भर्ती अभी नहीं हो रही है। अनेक मंत्रालयों में बहुत से ऐसे पद हैं, जो पिछले चार महीने के दौरान खाली हो गए हैं। यानी संबंधित अधिकारी या कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं। अब उनकी जगह पर केंद्र सरकार नई भर्ती करने की बजाए सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मियों को दोबारा से सेवा का मौका दे रही है। इसके लिए अधिकतम आयु 63 साल रखी गई है। ये अधिकारी बतौर प्राइवेट कंसल्टेंट नियुक्त होंगे। 

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खास बात है कि ये रहेंगे प्राइवेट, मगर इन्हें जो जिम्मेदारियां मिली हैं, वे सरकारी अधिकारी से भी ज्यादा हैं। मसलन, ये कंसल्टेंट मंत्रियों और टॉप अफसरों का सारा कामकाज देखेंगे। संसद में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब तैयार करेंगे, कोर्ट केसों की पैरवी करेंगे, वार्षिक रिपोर्ट, योजनाओं का क्रियान्वयन, मंत्रियों की नोटशीट, विजिलेंस और तमाम वे कार्य जो अमूमन सरकारी अधिकारी ही करते हैं, इन्हें सौंपे गए हैं। 

शुरू में एक वर्ष और बाद में एक साल के लिए बढ़ाई जा सकती है नियुक्ति 
डीओपीटी ने इस तरह की नियुक्तियों के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने इस बाबत विज्ञापन जारी कर दिया है। मंत्रालय के तहत आने वाले सभी विभागों को यह सूचना दे दी गई है कि वे भी इस दिशा में प्रयास करें। जो अधिकारी कुछ माह पहले सेवानिवृत्त हुए हैं, उनसे आवेदन कराया जाए। यदि वे विभाग के नियुक्ति मापदंडों पर खरे उतरते हैं तो उन्हें बतौर कंसल्टेंट रख लिया जाएगा। शुरू में यह नियुक्ति एक साल के लिए रहेगी। उसका कार्यकाल अगले एक वर्ष के लिए बढ़ाया भी जा सकता है।
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ये पद सेक्शन अफसर, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के लिए हैं। हिंदी अधिकारी के पद पर नियुक्त होने वाले व्यक्ति को संसदीय सवाल जवाब का अनुवाद करना होगा। कैबिनेट नोट का हिंदी ट्रांसलेट, संसदीय मामले, संसदीय समितियों की बैठक का ब्यौरा, वार्षिक रिपोर्ट व बजट को हिंदी में लिखना होगा।

अधिकारियों को ये सब करना होगा, बड़ी है जिम्मेदारी
कंसल्टेंट नियुक्त होने वाले व्यक्ति को एस्टेब्लिशमेंट, सामान्य प्रशासन, वित्त, योजनाओं का क्रियान्वयन, रूल्स एंड रेग्यूलेशन, प्रपोजल तैयार करना, ईएफसी व एसएफसी नोट्स बनाना, कैबिनेट नोट, बजट की तैयारी, वार्षिक रिपोर्ट, पंचवर्षीय योजना, आउटकम बजट, मंत्री और सीनियर अधिकारी के लिए ब्रीफ नोट तैयार करना व कोर्ट केसों का निपटारा आदि कार्य करने होंगे।

कानूनी अधिकारी के पद पर उस व्यक्ति को लगाया जाएगा, जो निदेशक के पद से रिटायर हुआ हो। उस व्यक्ति को कोर्ट का जवाब तैयार करना और अदालत एवं दूसरे विभागों के अधिकारियों के साथ लाइजनिंग भी करनी पड़ेगी। कानूनी अधिकारी की नियुक्ति के लिए आयु सीमा 65 साल निर्धारित की गई है। यदि विभाग का सचिव मंजूरी दे तो यह आयु सीमा बढ़कर 70 साल भी हो सकती है। हालांकि इस मामले में संबंधित व्यक्ति के स्वास्थ्य को ध्यान में रखा जाएगा।

कंसल्टेंट को भत्ते नहीं मिलेंगे। उसे वह सेलरी मिलेगी, जो रिटायर होने के वक्त मिल रही थी। उसे डीए भी मिलेगा, कुल वेतन में से पेंशन व डीए घटा दिया जाएगा। सभी कंसल्टेंट का मुख्यालय दिल्ली रहेगा। उसे एमएस वर्ड व पावर प्वाइंट जैसी विद्या में पारंगत होना होगा। टेलीफोन, स्टाफ कार और दूसरे परिवहन की सुविधा नहीं मिलेगी। विभाग के खर्च पर विदेशी टूर नहीं होगा। कार्यालय के कामकाज से अगर कंसल्टेंट को बाहर जाना पड़ता है तो उसके लिए टीए डीए दिया जाएगा।
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