रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान परियोजना के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और तीन बड़ी कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से भविष्य में भारतीय वायुसेना की ताकत को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एमका) के प्रोजेक्ट की कमान सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) की बजाय निजी क्षेत्र के हाथों में सौंप दी गई है। रक्षा मंत्रालय ने तीन निजी कंपनियों को आधिकारिक तौर पर इस विमान के निर्माण के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है।
तेजस मार्क1ए का ऑर्डर पूरा करने में जुटा HAL
इस फैसले की एक वजह यह भी है कि एचएएल अपने तेजस मार्क1ए जैसे भारी भरकम ऑर्डर समय पर पूरा नहीं कर सका। कंपनी को इसके बाद तेजस मार्क-2 भी बनाना है। यदि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का प्रोजेक्ट एचएएल के पास ही रहता तो विमान की आपूर्ति 2035 से भी देरी का अंदेशा बना रहता। एचएएल का भले निगमीकरण कर दिया गया हो, पर वह प्रशासनिक लेटलतीफी से आजाद नहीं है। निजी कंपनियां सामान खरीदने में स्वतंत्र होंगी। इसलिए समय सीमा का पालन कर पाएंगी। एमका को निजी हाथों में सौंपने से आपूर्ति में लगने वाला वाला समय कम हो जाएगा।
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विमान के निर्माण के लिए आरएफपी जारी
बता दें कि, एएमसीए कार्यक्रम को भारत की सबसे महत्वाकांक्षी लड़ाकू विमान परियोजना माना जा रहा है, जिसके 2030 के मध्य से भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता की रीढ़ बनने की उम्मीद है। यह एक दो इंजन वाला स्टील्थ लड़ाकू विमान होगा, जिसमें उन्नत सेंसर प्रणाली, अंदरूनी हथियार रखने की सुविधा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक और नेटवर्क से जुड़ी युद्ध क्षमता जैसे आधुनिक फीचर्स होंगे।
जल्द मिलेगा विमान
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लि. (टीएएसएल), एलएंडटी व कल्याणी समूह की भारत फोर्ज कंपनी को कमान सौंपने के फैसले के बाद एमका विमान की पहली प्रोटोटाइप उड़ान 2028 तक होने की संभावना है। निजी कंपनियों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला तक सीधी पहुंच सरकारी लेटलतीफी कम करेगी। इससे परियोजना के तेजस की तरह सालों-साल लटकने का जोखिम कम हो गया है। निजी कंपनियां विदेशी इंजन निर्माताओं के साथ संयुक्त उपक्रम लगाने में ज्यादा लचीली होती हैं।