मुंबई की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने स्पेशल केस नंबर 4/2015 में एमए नंबर 169/2026 पर गत सप्ताह एक अहम आदेश दिया है। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) केस में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त 3464 करोड़ रुपये की संपत्ति को स्पेशल कोर्ट ने मॉनेटाइज करने और उसके बाद 1950 करोड़ (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी), मुंबई द्वारा मंजूर इन्वेस्टर्स के लिए वन-टाइम सेटलमेंट के तौर पर) की वापसी/बहाली की मंजूरी दी गई है। यह आदेश उन इन्वेस्टर्स को पैसा वापस दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है, जो 2013 में पेमेंट डिफॉल्ट के बाद से पिछले 13 वर्षों से रिकवरी का इंतजार कर रहे हैं।
ये है मामले की पृष्ठभूमि
2013 में मुंबई के एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में इसे मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्लू) को ट्रांसफर कर दिया गया। यह एफआईआर प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर, उसके डायरेक्टर और मुख्य अधिकारियों, 25 डिफॉल्टर सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात व जालसाजी के आरोपों में दर्ज की गई थी। आरोप था कि बिना असल स्टॉक के कमोडिटी में ट्रेडिंग की अनुमति दी गई थी। इसके कारण हुए पेमेंट डिफॉल्ट से लगभग 13,000 निवेशक प्रभावित हुए। लगभग ₹5,600 करोड़ की बकाया राशि फंस गई।
35 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी
ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) के तहत मामले की जांच की। अब तक 35 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए हैं, जिनमें लगभग ₹3,464.03 करोड़ की संपत्ति अटैच की गई है। साथ ही, स्पेशल कोर्ट में सप्लीमेंट्री PC (अभियोजन शिकायत) सहित प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दायर की गई है।
ये है सेटलमेंट स्कीम
28.11.2025 को एनसीएलटी, मुंबई ने कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 230–232 के तहत एक 'स्कीम ऑफ अरेंजमेंट' को मंजूरी दी। इस स्कीम में 5,682 खास लेनदारों (क्रेडिटर्स) के लिए ₹1,950 करोड़ के वन-टाइम सेटलमेंट का प्रावधान था। इस स्कीम को 92% से ज़्यादा लेनदारों ने मंज़ूरी दी थी। इसमें हर लेनदार को उनके वेरिफाइड क्लेम का कम से कम 42% हिस्सा वापस मिलने का भरोसा दिया गया था। एनसीएलएटी ने 15.01.2026 को इस मंज़ूरी के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती को भी खारिज कर दिया गया। 13.04.2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस स्कीम को लागू करने के लिए जल्द से जल्द उचित आदेश जारी करें, क्योंकि इसका मकसद हकदार निवेशकों को भुगतान करना है।
भरपाई के लिए ईडी की लगातार कोशिशें
जब्त की गई सभी संपत्तियों (यानी ₹3,464 करोड़) को बेचकर पैसा वसूलने (मॉनेटाइजेशन) का आदेश, ₹1,950 करोड़ की तुरंत भरपाई और बाकी रकम की बाद में भरपाई (जैसा कि स्पेशल कोर्ट तय करेगा) के लिए एक अहम कदम है। इस मामले में भरपाई की दिशा में ईडी का यह पहला कदम नहीं है। इससे पहले, जस्टिस (रिटायर्ड) प्रदीप नंदराजोग की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के निर्देशों पर, ईडी ने निवेशकों में बांटने के लिए कमेटी के सामने टिम्बर ट्रेल ट्रैवल टुडे प्राइवेट लिमिटेड के शेयर और उन पर हुआ मुनाफ़ा (कुल मिलाकर लगभग ₹17.47 करोड़ की कीमत) पेश किया था। ईडी, वित्तीय अपराध से जुड़ी संपत्तियों को ज़ब्त करने, मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में कार्रवाई करने और कानून के मुताबिक योग्य निवेशकों और दावा करने वालों को भरपाई दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।