अभी सभी पार्टियां उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में पढ़े-लिखे उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारने का दावा कर रही हैं। लेकिन वर्ष 2012 में इन्हीं राज्यों के विधानसभा चुनाव में उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवार आधे से कम थे। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 46 प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे थे जिनके पास स्नातक या उससे अधिक शैक्षणिक योग्यता की डिग्री थी और 54 फीसदी ऐसे उम्मीदवार थे जो 12 वीं या इससे कम पढ़े-लिखे थे।
गैर सरकारी संस्था असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने वर्ष 2012 में इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव लड़ने वाले कुल उम्मीदवारों में से उत्तर प्रदेश में 44 फीसदी (2964), उत्तराखंड में 48 फीसदी (370), पंजाब में 28 फीसदी (297), मणिपुर में 75 फीसदी (206) और गोवा में 36 फीसदी (76) उम्मीदवार ऐसे थे जिनके पास स्नातक या इससे अधिक शैक्षणिक योग्यता की डिग्री थी।
इसके अलावा एडीआर ने उत्तर प्रदेश के 2195 उम्मीदवारों के हलफनामों का बेहद बारीकी से विश्लेषण किया। इनके हलफनामों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 479 उम्मीदवार परस्नातक, 207 उम्मीदवार दसवीं पास और 140 उम्मीदवार आठवीं पास थे। इसके अलावा सात उम्मीदवार अशिक्षित थे। वहीं उत्तराखंड 278 उम्मीदवारों के हलफनामों की जानकारी एडीआर ने परखी। एडीआर के मुताबिक इनमें से एक भी उम्मीदवार ऐसा नहीं जो परास्नातक या इससे ज्यादा पढ़ा हो।
पंजाब, गोवा और मणिपुर में भी प्रत्याशियों की शैक्षिक योग्यता थी कम
वहीं पंजाब के 408 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण एडीआर ने किया। इनमें सबसे ज्यादा 92 उम्मीदवार सिर्फ 10वीं तक ही पढ़े थे। 12वीं पास उम्मीदवारों की संख्या 57, स्नातक पास 87, परस्नातक पास 56 और डॉक्ट्रेट पास सिर्फ एक था।
एडीआर ने गोवा के 129 और मणिपुर के 258 उम्मीदवारों के हलफनामों पर शैक्षणिक योग्यता का विश्लेषण किया। गोवा में सबसे ज्यादा 32 उम्मीदवार ग्रेजुएट, 14 उम्मीदवार परस्नातक, 28 उम्मीदवार 12वीं पास और 17 उम्मीदवार 10वीं पास थे। वहीं मणिपुर में दस उम्मीदवार डॉक्ट्रेट, 52 उम्मीदवार परस्नातक, 104 उम्मीदवार स्नातक, 23 उम्मीदवार 12 वीं पास, 17 उम्मीदवार 10वीं पास थे।
गौरतलब है कि एडीआर ने 2012 में विधानसभा चुनाव के दौरान इन पांच राज्यों के कुल 3268 उम्मीदवारों के हलफनामों का परीक्षण किया था। जबकि उत्तर प्रदेश में साढ़े छह हजार से ज्यादा, उत्तराखंड में करीब आठ सौ, पंजाब में करीब एक हजार, गोवा में करीब सवा दो सौ और मणिपुर में करीब पौने तीन सौ उम्मीदवारों ने विधानसभा चुनाव लड़ा था।