चेन्नई के 52 साल के गणप्रकाशम के लिए जेल का मतलब घर है। जो उनके सिर पर छत, तीन समय का खाना और दोस्तों का साथ देता है। चोरी के आरोप में उसे मार्च में पुझल जेल में बंद किया गया था। हालांकि उसके लिए चीजें उस समय बदल गईं जब वह जमानत पर जेल से बाहर आया।
जेल में कैद अपने दोस्तों और खाने कि याद आते ही गणप्रकाशम ने पार्किंग में खड़ी बाइक और फिर पेट्रोल चुराना शुरू कर दिया। उसने सीसीटीवी कैमरे के सामने जानबूझकर अपना चेहरा दिखाया ताकि पुलिस उसे दोबारा गिरफ्तार करके उसी जेल में भेज दे। दरअसल, घर आकर वह बिलकुल खुश नहीं था क्योंकि उसके परिवार के सदस्यों को उसकी कोई चिंता नहीं थी।
तंबारम के सहायक पुलिस आयुक्त पी अशोकन ने कहा कि उसने बताया कि घर के अलावा उसे कहीं भी कोई आलसी नहीं कहता था। खाने के अलावा वह अपने जेल के दोस्तों को याद कर रहा था। मार्च में गिरफ्तार होने के बाद गणप्रकाशम को तीन महीने बाद 29 जून को जमानत पर रिहा किया गया था।
गणप्रकाशम ने पुलिस को बताया कि रिहा होने के बाद उसके लिए जिंदगी आसान नहीं थी। मेरे बच्चे और पत्नी हमेशा मुझे गालियां देते थे। इसलिए उसने वापस जेल में लौटने का फैसला लिया। ताकि उसे खाना और दोस्तों का साथ मिल सके। घर से निकलने के बाद वह जेल वापस लौटने का रास्ता ढूंढने लगा।
इसी वजह से उसने पश्चिमी तंबारम के कैलाशपुरम फर्स्ट स्ट्रीट से बाइक चुराई। उसने इस बात को सुनिश्चित किया कि उसका कृत्य सीसीटीवी में कैद हो जाए। इसके बाद शहर में घूमना शुरू कर दिया। जब भी बाइक का पेट्रोल खत्म हो जाता तो वह पार्किंग में खड़ी गाड़ियों से पेट्रोल चुराना शुरू कर देता था।
उसे तंबारन के पास बाइक से पेट्रोल चुराते हुए देखा गया। जिसके बाद लोगों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि उसने न केवल पेट्रोल बल्कि बाइक भी चुराई है। आरोपी के लिए आखिर में रहात की बात यह हुई कि उसे दोबारा पुझल जेल भेज दिया गया है जहां वह जाना चाहता था।