पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई), मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन समेत अन्य संस्थानों के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि देश में डायबिटीज के 75 फीसदी से अधिक मरीजों में शुगर नियंत्रित नहीं है। वहीं, करीब आधे मरीजों को इस बात की जानकारी ही नहीं रहती कि उन्हें डायबिटीज है।
अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 8.8 फीसदी भारतीय डायबिटीज से पीड़ित हैं। देश की 125 करोड़ की आबादी में से लगभग 11.5 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। यानि कि चीन के बाद सबसे ज्यादा डायबिटीज पीड़ित भारत में ही हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज और डिलिपिडीमिया, हाइपरटेंशन, मोटापा जैसी अन्य गैर-संक्रामक बीमारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा और निरंतर बढ़ने वाला बोझ बनते जा जा रहे हैं।
इसके कारणों की पड़ताल में सामने आया है कि दरअसल औसत भारतीयों की जीवनशैली काफी बदल चुकी है। लोग घर के खाने की बजाय बाहर का खाना, जंक फूड, फास्ट फूड वगैरह पर जोर देने लगे हैं। इन बदलावों के कारण समाज में मोटापा बहुत तेजी से फैलने लगा। वर्तमान में डायबिटीज मरीजों की तादाद बढ़ने का बड़ा कारण मोटापा है।
डायबिटीज तीन प्रकार की होती हैं। जबकि ज्यादातर भारतीय टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित होते हैं। 90 फीसदी मरीज इसी श्रेणी में आते हैं।
टाइप-1 डायबिटीज
यह डायबिटीज बचपन में या किशोर अवस्था में अचानक इंसुलिन के उत्पादन की कमी होने से होने वाली बीमारी है। ऐसा किसी एंटीबॉडीज की वजह से बीटा सेल्स के पूरी तरह काम करना बंद करने से होता है। शरीर में ग्लूकोज की बढ़ी हुई मात्रा को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत होती है। इसके मरीज काफी कम होते हैं। इंसुलिन वह एंजाइम है जो शरीर के भीतर खाने को तोड़ कर ऊर्जा में बदलता है।
टाइप-2 डायबिटीज
यह डायबिटीज आमतौर पर 30 साल की उम्र के बाद धीरे-धीरे बढ़ने बाली बीमारी है। ज्यादातर भारतीय इसी से पीड़ित हैं। इसमें ज्यादातर लोगों का वजन सामान्य से ज्यादा होता है या उन्हें पेट के मोटापे की समस्या होती है। कई बार यह आनुवांशिक होता है, तो कई मामलों में खराब जीवनशैली से संबंधित होता है। इसमें इन्सुलिन कम मात्रा में बनता है या पेंक्रियाज सही से काम नहीं कर रहा होता है।
जेस्टेशनल डायबिटीज
वे गर्भवती महिलाएं जिन्हें पहले कभी डायबिटीज की शिकायत न रही हो, उन्हें यह ज्यादा होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान खून में ग्लूकोज की मात्रा जरूरत से ज्यादा होने से ऐसा होता है।
डॉक्टरों की मानें तो डायबिटीज में थकान और प्यास जैसे लक्षण होते हैं, जिनसे सीधे तौर पर किसी बीमारी का पता नहीं चलता। दूसरे देशों की तरह भारत में नियमित चेकअप नहीं हो पाता। कारण कि हमारे देश में न तो टेस्ट करने के लिए पर्याप्त मशीनें और न ही इलाज करने के लिए पर्याप्त दवाएं हैं।
दुनियाभर में करीब 35 करोड़ लोग मधुमेह के शिकार हैं। चीन में डायबिटीज के करीब 9.50 करोड़ मामले सामने आए हैं। इस बीमारी को हल्के में लेना गलती होगी, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2030 तक डायबिटीज लोगों की मौत का सातवां सबसे बड़ा कारण होगा।
- आसानी से पचने वाला भोजन करें
- मौसमी और रसदार फल खाएं, ड्राय फ्रूट्स भी लें
- गुनगुना पानी, छाछ, जौ का दलिया और मल्टीग्रेन आटा का सेवन करें
- डायबिटीज के रोगी को दिन में सोना, मल-मूत्र आदि नहीं रोकना चाहिए
- मांसाहार, शराब और सिगरेट आदि से दूरी बनाएं रखें
- अधिक से अधिक पानी पीएं, नींबू पानी भी लें, फायदेमंद रहेगा
इन चीजों से बनाएं दूरी
बासी भोजन, डिब्बा बंद आहार, फास्ट फूड, जंक फूड, ज्यादा तेल-मसाले वाले भोजन