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भारत में 50 फीसदी लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें डायबिटीज है, कहीं आप भी उनमें से एक तो नहीं?

Tue, 11 Jun 2019 05:44 PM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायबिटीज: भविष्य के लिए खतरा, नहीं चेते तो होगी मुश्किल - फोटो : अमर उजाला
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डायबिटीज या मधुमेह एक ऐसी बीमारी हैं, जिसकी वजह से खून में शुगर (चीनी/शर्करा) की मात्रा बढ़ जाती है। अमेरिका में नेत्रहीनता की तीसरी बड़ी वजह भी यही बीमारी है। कुछ दशकों पहले तक हमारे देश में यह बीमारी उम्र के साथ बढ़ती थी। लेकिन अब यह लाइफस्टाइल जनित बीमारी का रूप ले चुकी है। अब बच्चे और युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं।

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आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में इस बीमारी से पीड़ित आधे लोगों को यह पता ही नहीं है कि उन्हें यह बीमारी है। जिन्हें पता है, उनमें से भी आधे यानि कुल पीड़ितों में से एक-चौथाई लोगों को ही इसका इलाज मिल पाता है। मधुमेह पीड़ितों पर हुए एक शोध से यह पता चला है कि 15 से 49 आयु वर्ग के केवल आधे वयस्क अपनी इस बीमारी के बारे में जानते हैं। सिर्फ एक-चौथाई पीड़ितों को ही इसका इलाज मिल पाता है और उनका ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है।

कई मामलों में तो इसका पता लगने में इतनी देर हो जाती है कि लोगों की दृष्टि चली जाती है। इसकी वजह से किसी का कोई अंग खराब हो जाता है तो किसी को किडनी की बीमारी हो जाती है। शोध पत्रिका बीएमसी मेडिसिन में भी प्रकाशित अध्ययन के नतीजों में बताया गया है कि मधुमेह से निपटने के लिए सबसे पहले लोगों को इसके बारे में जानकारी होना जरूरी है। लेकिन, इससे ग्रस्त 47.5 फीसद लोगों को अपनी बीमारी के बारे में पता ही नहीं होता, जिस वजह से उन्हें इलाज नहीं मिल पाता।

शोध के प्रमुख बिंदु

  • शोध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार सर्वेक्षण के वर्ष 2015-16 के आंकड़ों का उपयोग 
  • 29 राज्यों व 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 15-49 वर्ष के करीब 7.2 लाख लोग शामिल
  • शोधकर्ताओं ने पाया कि 52.5 फीसदी पीड़ित को ही मालूम है कि उन्हें डायबिटीज है
  • लगभग 40.5 फीसद लोगों ने बताया कि डायबिटीज कंट्रोल के लिए दवा ले रहे हैं
  • कुल पीड़ितों में से सिर्फ 24.8 फीसदी लोगों का डायबिटीज कंट्रोल में पाया गया
  • दवा से 20.8 फीसदी पुरुषों और 29.6 फीसदी महिलाओं का डायबिटीज कंट्रोल में
  • लगभग आधे डायबिटीज पीड़ितों को अपने हाई ब्लड शुगर लेवल की जानकारी नहीं है
  • डायबिटीज से अनजान लोगों की संख्या गोवा और आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा 
  • उत्तर प्रदेश में डायबिटीज के मरीज कम, लेकिन इलाज से वंचितों की संख्या ज्यादा 
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चौंकाते हैं कई अन्य शोध अध्ययन भी

- फोटो : अमर उजाला
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई), मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन समेत अन्य संस्थानों के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि देश में डायबिटीज के 75 फीसदी से अधिक मरीजों में शुगर नियंत्रित नहीं है। वहीं, करीब आधे मरीजों को इस बात की जानकारी ही नहीं रहती कि उन्हें डायबिटीज है।

अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 8.8 फीसदी भारतीय डायबिटीज से पीड़ित हैं। देश की 125 करोड़ की आबादी में से लगभग 11.5 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। यानि कि चीन के बाद सबसे ज्यादा डायबिटीज पीड़ित भारत में ही हैं।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज और डिलिपिडीमिया, हाइपरटेंशन, मोटापा जैसी अन्य गैर-संक्रामक बीमारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा और निरंतर बढ़ने वाला बोझ बनते जा जा रहे हैं। 

इसके कारणों की पड़ताल में सामने आया है कि दरअसल औसत भारतीयों की जीवनशैली काफी बदल चुकी है। लोग घर के खाने की बजाय बाहर का खाना, जंक फूड, फास्ट फूड वगैरह पर जोर देने लगे हैं। इन बदलावों के कारण समाज में मोटापा बहुत तेजी से फैलने लगा। वर्तमान में डायबिटीज मरीजों की तादाद बढ़ने का बड़ा कारण मोटापा है।

तीन तरह के डायबिटीज में ज्यादातर भारतीय टाइप-2 के मरीज 

डायबिटीज के प्रकार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
डायबिटीज तीन प्रकार की होती हैं। जबकि ज्यादातर भारतीय टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित होते हैं। 90 फीसदी मरीज इसी श्रेणी में आते हैं।

टाइप-1 डायबिटीज

यह डायबिटीज बचपन में या किशोर अवस्था में अचानक इंसुलिन के उत्पादन की कमी होने से होने वाली बीमारी है। ऐसा किसी एंटीबॉडीज की वजह से बीटा सेल्स के पूरी तरह काम करना बंद करने से होता है। शरीर में ग्लूकोज की बढ़ी हुई मात्रा को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत होती है। इसके मरीज काफी कम होते हैं। इंसुलिन वह एंजाइम है जो शरीर के भीतर खाने को तोड़ कर ऊर्जा में बदलता है। 

टाइप-2 डायबिटीज

यह डायबिटीज आमतौर पर 30 साल की उम्र के बाद धीरे-धीरे बढ़ने बाली बीमारी है। ज्यादातर भारतीय इसी से पीड़ित हैं। इसमें ज्यादातर लोगों का वजन सामान्य से ज्यादा होता है या उन्हें पेट के मोटापे की समस्या होती है। कई बार यह आनुवांशिक होता है, तो कई मामलों में खराब जीवनशैली से संबंधित होता है। इसमें इन्सुलिन कम मात्रा में बनता है या पेंक्रियाज सही से काम नहीं कर रहा होता है।

जेस्टेशनल डायबिटीज

वे गर्भवती महिलाएं जिन्हें पहले कभी डायबिटीज की शिकायत न रही हो, उन्हें यह ज्यादा होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान खून में ग्लूकोज की मात्रा जरूरत से ज्यादा होने से ऐसा होता है।

हल्के में न लें, दवाएं पर्याप्त नहीं, बरतें सावधानी

diabetes
डॉक्टरों की मानें तो डायबिटीज में थकान और प्यास जैसे लक्षण होते हैं, जिनसे सीधे तौर पर किसी बीमारी का पता नहीं चलता। दूसरे देशों की तरह भारत में नियमित चेकअप नहीं हो पाता। कारण कि हमारे देश में न तो टेस्ट करने के लिए पर्याप्त मशीनें और न ही इलाज करने के लिए पर्याप्त दवाएं हैं।

दुनियाभर में करीब 35 करोड़ लोग मधुमेह के शिकार हैं। चीन में डायबिटीज के करीब 9.50 करोड़ मामले सामने आए हैं। इस बीमारी को हल्के में लेना गलती होगी, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2030 तक डायबिटीज लोगों की मौत का सातवां सबसे बड़ा कारण होगा।

डायबिटीज से बचाव के तरीके 

  • एक रिसर्च के अनुसार रोजाना 30-45 मिनट का वर्कआउट डायबिटीज होने के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है।
  • अधिक शुगर और प्रोसेस्ड अनाज जैसे नान, कुल्चा, नूडल्स और मैदा से बने ब्रेड या बन खाने से परहेज करें।
  • आलू, सफेद चावल, अधिक मसाला व तला-भुना खाना, अरबी और शकरकंद का प्रयोग कम करें। 
  • तनाव से दूर रहें। मानसिक तौर पर खुद को शांत और स्वस्थ रखने के लिए ध्यान करें। 

डायबिटीज से पीड़ित हैं तो... 

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  • सुबह जल्दी उठें और व्यायाम के लिए समय निकालें 
  • वर्कआउट में टहलना, साइक्लिंग, स्विमिंग और योग को शामिल करें 
  • डायबिटीज एवं हार्ट की दवाएं कभी बंद नहीं करें
  • चालीस की उम्र के बाद शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच कराएं
  • किडनी फंक्शन टेस्ट और लिवर फंक्शन टेस्ट भी जरूर कराएं
  • टीएमटी और रेटिना की जांच कराएं, जरूरत हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
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खान-पान में रखें ध्यान

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
  • आसानी से पचने वाला भोजन करें
  • मौसमी और रसदार फल खाएं, ड्राय फ्रूट्स भी लें
  • गुनगुना पानी, छाछ, जौ का दलिया और मल्टीग्रेन आटा का सेवन करें
  • डायबिटीज के रोगी को दिन में सोना, मल-मूत्र आदि नहीं रोकना चाहिए
  • मांसाहार, शराब और सिगरेट आदि से दूरी बनाएं रखें
  • अधिक से अधिक पानी पीएं, नींबू पानी भी लें, फायदेमंद रहेगा

इन चीजों से बनाएं दूरी

बासी भोजन, डिब्बा बंद आहार, फास्ट फूड, जंक फूड, ज्यादा तेल-मसाले वाले भोजन 
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