सरकार ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूती प्रदान करने के लिए कई बड़े एलान किए हैं। इस दिशा में 50 नए हवाई अड्डे देश भर में खोले जाएंगे। टाटा समूह के एअर इंडिया को खरीदने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय के लिए आवंटन में भारी कमी की गई है। उसे 3,113.36 करोड़ रुपये दिए गए।
एनएचएआई को 1.62 लाख करोड़
राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र को 2.70 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का फंड बीते वित्त वर्ष की तुलना में 1.42 लाख करोड़ से बढ़ाकर 1.62 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
लोकपाल को 92 करोड़ से ही करना पड़ा संतोष
भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल को अनुमान से कम 92 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। लोकपाल को पिछले वित्त वर्ष में 34 करोड़ रुपये दिए गए थे, इस वर्ष के लिए इसे संशोधित कर 197.50 करोड़ रुपये कर दिया गया था, लेकिन यह फंड लोकपाल को आवंटित नहीं किया गया।
सीबीआई को मिले 946 करोड़
केंद्रीय बजट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को 946 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो वित्त वर्ष 2023 की तुलना में 4.4 प्रतिशत अधिक है।
सीवीसी के हिस्से में आए 44.46 करोड़
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को पिछले बजट से एक करोड़ की मामूली वृद्धि देते हुए 44.46 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
तटीय नौ-परिवहन में पीपीपी मोड, जरूरत होने पर ही सरकारी फंडिंग मिलेगी। नागरिकों को परिवहन और माल ढुलाई के लिए जलमार्ग से साधन दिए जाएंगे। ये परिवहन माध्यम न केवल सस्ते होंगे, बल्कि संचालन में ईंधन भी कम खर्च होगा।
रॉकेट व उपग्रह बनाने से लेकर पृथ्वी से चांद-सूरज तक नजर रखने के लिए 12,544 करोड़
पृथ्वी से लेकर चंद्रमा व सूर्य तक नजर रखने के लिए अंतरिक्ष विभाग अध्ययन मिशन भेज सके, यह ध्यान रखते हुए बजट 2023-24 में विभाग को 12,544 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। यह पिछले साल प्रस्तावित बजट 13700 करोड़ से तो 8.44 प्रतिशत कम हैं, लेकिन संशोधित अनुमान 10,530.04 से अधिक है। वहीं 2021-22 में 12,473.84 करोड़ रुपये का वास्तविक आवंटन हुआ था।
9,440.66 करोड़ रुपये खर्च होंगे अंतरिक्ष तकनीक पर
प्रमुख काम : रॉकेट व उपग्रह निर्माण, विकास व मिशन। यह राशि विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, इसरो इनर्शियल सिस्टम्स यूनिट, लिक्विड प्रपल्शन सिस्टम्स सेंटर, इसरो प्रपल्शन कॉम्प्लेक्स, यूआर राओ उपग्रह केंद्र, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स प्रणाली प्रयोगशाला, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, इसरो टेलिमेट्री पर भी खर्च होगी।
1558.95 करोड़ रुपये अंतरिक्ष एप्लीकेशन के लिए
प्रमुख काम : स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, विकास व शैक्षिक संचार केंद्र, राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर, भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, पृथ्वी के पर्यवेक्षण मिशन और आपदा प्रबंधन से जुड़े कामों पर यह पैसा खर्च होगा।