दिल्ली में आयोजित मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल समारोह के दौरान 2023 और 2024 के लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के पांच जवानों को उनके अद्वितीय साहस और सेवा के लिए मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल दिया गया। इस दौरान भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने देश के उन भूले-बिसरे जासूसों को सम्मान देने की अपील की, जिन्हें अंग्रेजों के समय तिब्बत, लद्दाख और अन्य सीमावर्ती इलाकों में गुप्त मिशनों पर रणनीतिक जानकारी जुटाने के लिए भेजा गया था। जनरल चौहान ने कहा कि उन्हें भी अब मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल से सम्मानित किए जाने पर विचार करना चाहिए।
सीडीएस चौहान ने मेमोरियल मेडल पर दिया जोर
साथ ही सीडीएस चौहान ने अपने भाषण में बताया कि मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल की स्थापना 1888 में हुई थी, और यह उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, खोज और टोही अभियानों में खास योगदान दिया हो। उन्होंने कहा कि यह मेडल सेना, प्रादेशिक सेना और असम राइफल्स के सेवारत और सेवानिवृत्त सभी जवानों के लिए खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां फ्रांसिस यंगहसबैंड जैसे ब्रिटिश खोजकर्ताओं को इतिहास में खूब जगह मिली है, वहीं भारतीय खोजकर्ताओं जैसे किशन सिंह, अब्दुल मजीद और शरत चंद्र दास को आज तक उतनी पहचान नहीं मिल सकी।
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