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ARMY: भारत के जांबाजों को मिला सम्मान, मैकग्रेगर मेडल से नवाजे गए पांच सैनिक; सीडीएस चौहान ने भी की खास अपील

Wed, 16 Apr 2025 09:04 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में आयोजित मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल समारोह के दौरान 2023 और 2024 के लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के पांच जवानों को उनके अद्वितीय साहस और सेवा के लिए मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल दिया गया। साथ ही इस कार्यक्रम में सीडीएस चौहान ने एक अहम अपील भी की। आइए जानते है उन्होंने क्या कहा...
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मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल समारोह में सीडीएस अनिल चौहान - फोटो : एक्स@HQ_IDS_India
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विस्तार
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दिल्ली में आयोजित मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल समारोह के दौरान 2023 और 2024 के लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के पांच जवानों को उनके अद्वितीय साहस और सेवा के लिए मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल दिया गया। इस दौरान भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने देश के उन भूले-बिसरे जासूसों को सम्मान देने की अपील की, जिन्हें अंग्रेजों के समय तिब्बत, लद्दाख और अन्य सीमावर्ती इलाकों में गुप्त मिशनों पर रणनीतिक जानकारी जुटाने के लिए भेजा गया था। जनरल चौहान ने कहा कि उन्हें भी अब मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल से सम्मानित किए जाने पर विचार करना चाहिए। 

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बता दें कि दिल्ली में यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनरल चौहान ने कहा कि इन भारतीय जासूसों को पंडित कहा जाता था और वे "सर्वे ऑफ इंडिया" के लिए काम करते थे। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे वीर और साहसी लोगों को भी मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल से सम्मानित किया जाना चाहिए।

किन-किन अधिकारियों को मिला पुरस्कार
अब बात अगर पुरस्कार पाने वाले अधिकारियों की करें तो इनमें 2023 के विंग कमांडर डी. पांडा (आईएएफ), ईए (आर) राहुल कुमार पांडे (नौसेना), 2024 सीएचईएए (आर) राम रतन जाट (नौसेना), सार्जेंट झूमर राम पूनिया (आईएएफ) के साथ-साथ निमास के निदेशक कर्नल रणवीर जामवाल को भी मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल पुरस्कार दिया गया, हालांकि वे कंचनजंगा पर अभियान में व्यस्त होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके।
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सीडीएस चौहान ने गुमनाम पंडितों का किया जिक्र
सीडीएस चौहान ने कहा कि पंडित किशन सिंह, अब्दुल मजीद और शरत चंद्र दास जैसे कई नाम हैं, जिन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में देश के लिए जानकारियां जुटाईं, लेकिन उन्हें आज तक वो पहचान नहीं मिली जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह पदक 1888 में शुरू हुआ था और अब समय आ गया है कि उन भारतीयों को भी इसमें शामिल किया जाए, जिन्होंने इसकी स्थापना से पहले ही बहादुरी और सेवा का उदाहरण पेश किया।

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ब्रेवेस्ट ऑफ द ब्रेव नामक पुस्तक का भी विमोचन
इस कार्यक्रम में 'ब्रेवेस्ट ऑफ द ब्रेव' नामक एक पुस्तक का भी विमोचन हुआ, जो परमवीर नायब सूबेदार चुन्नी लाल के जीवन पर आधारित है। इसे सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने लिखा है। याद रहे कि जनरल दुआ ने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया है और कई सर्जिकल स्ट्राइक की योजना भी बनाई थी।

सीडीएस चौहान ने मेमोरियल मेडल पर दिया जोर 
साथ ही सीडीएस चौहान ने अपने भाषण में बताया कि मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल की स्थापना 1888 में हुई थी, और यह उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, खोज और टोही अभियानों में खास योगदान दिया हो। उन्होंने कहा कि यह मेडल सेना, प्रादेशिक सेना और असम राइफल्स के सेवारत और सेवानिवृत्त सभी जवानों के लिए खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां फ्रांसिस यंगहसबैंड जैसे ब्रिटिश खोजकर्ताओं को इतिहास में खूब जगह मिली है, वहीं भारतीय खोजकर्ताओं जैसे किशन सिंह, अब्दुल मजीद और शरत चंद्र दास को आज तक उतनी पहचान नहीं मिल सकी।

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क्यों खास था ये कार्यक्रम, समझिए

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गौरतलब है कि यूनाइटेड सर्विस इंस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सैन्य इतिहास, सम्मान और प्रेरणा का संगम था। इसको लेकर सीडीएस चौहान ने कहा कि भारत के वीर सैनिकों की गाथाएं, जैसे चुन्नी लाल की, आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।

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