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झारखंड और उत्तर प्रदेश में महज एक महीने में 442 बच्चों की मौत

Thu, 31 Aug 2017 06:24 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज - फोटो : ANI
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 झारखंड के दो बड़े अस्पतालों में 146 और गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में 296 बच्चों की मौत चौंकाती है। महज एक महीने में देश के दो बड़े राज्यों में 442 बच्चो की मौत हो गई है। चौंकाने वाली बात ये है कि इन बच्चों की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हुई है। लेकिन अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर क्यों दवा, इलाज और डॉक्टर की व्यवस्था होने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो रही है?
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 अगस्त महीने में  झारखंड राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रांची स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में 103 और जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल में 41 बच्चों की मौत हो गई । झारखंड के तीन मेडिकल कालेजों में महज आठ महीनों में 1000 से भी अधिक बच्चों की मौत हो गई है। झारखंड में आदिवासियों में कुपोषण एक बड़ी समस्या है।

इस कारण सरकार यहां डबल फोर्टिफाइड नमक राशन दुकानों पर देती हैं। इसमें विशेषतौर पर आयरन मिलाया जाता है ताकि गर्भवती महिलाओं को आयरन की कमी न हो और बच्चे स्वस्थ रहें। तमाम इंतजामों के बाद भी आज भी कुपोषण इतनी बड़ी समस्या क्यों बनी हुई है? जबकि झारखंड सरकार काफी समय से कुपोषण से लड़ने के लिए व्यापक कदम उठाती आ रही है।
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बीआरडी अस्पताल, गोरखपुर
 गोरखपुर से आ रही दिल दहला देने वाली खबरों के बीच लगभग हर दिन बच्चों  की मौत की खबर चौंका रही है। महज आठ महीनों में 1256 बच्चों की मौत का आंकड़ा किसी भी राज्य के लिए अच्छी खबर नहीं हो सकती है। अगस्त के पहले पखवाड़े में बच्चों की मौत की खबर ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई थी लेकिन पिछले दो दिनों में बच्चों की मौत के लिए क्या कहा जाएगा।  यूनिसेफ के आंकड़ो के अनुसार 2016 में 0 से 5 साल के 1000 जन्म लेने वाले बच्चों के मरने वाले बच्चों की संख्या 48 थी।

इस बीच मानवाधिकार आयोग ने इन मौतों पर रिपोर्ट तलब की है। वहीं गोरखपुर से एक बार फिर महज दो दिनों में 42 से अधिक बच्चे इलाज के दौरान मारे गए। लेकिन इसमें हर मरने वाला बच्चा दिमागी बुखार की वजह से नहीं मरा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर पीके सिंह ने कहा कि मौत की वजह बच्चे बहुत गंभीर स्थिति में अस्पताल आते हैं और दवाइयों और व्यवस्था के बावजूद उन्हें बचाना कठिन हो जाता है।  
 
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