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लेफ्ट हों या राइट जीतेंगी महिला

Thu, 31 Aug 2017 02:40 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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JNU
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 चुनावी बिगुल बजते ही जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में चुनावी सरगोशी तेज हो गई है। जेएनयू में आठ सितंबर को चुनाव होना है और इसका सबसे चर्चित प्रेसिडेंशियल डिबेट 6 सितंबर को होगा, जो हर बार की तरह इसबार भी यह तय करेगा कि इस बार का यह चुनाव किस करवट बैठने वाला है।
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9 फरवरी 2016 को जेएनयू में लगे देश विरोधी नारे के बाद इस बार का चुनाव कई मामलों में खास होने वाला है। अलग-अलग पार्टी के प्रवक्ताओं से बात करने के बाद एक कॉमन बात सामने आई कि सभी पार्टी कुल मिलाकर स्टूडेंट से जुड़े मुद्दों के बीच जेएनयू से हटाए गए 900 स्टूडेंट्स पर अपनी बात रख रहे हैं। वहीं दूसरा बड़ा मुद्दा नजीब की गुमशुदगी भी है। लेकिन इस चुनाव को एक और बात अलग कर रही है वो है महिला शक्ति।

चुनावी मैदान में उतरीं सभी पार्टियों ने अपनी प्रेसिडेंट कैंडिडेट महिला को रखा है। जिसमें एबीवीपी की निधि त्रिपाठी, एआईएसएफ की अपराजिता राजा, कंबाइंड लेफ्ट से गीता कुमारी, बापसा की शबाना अली और एनएसयूआई की वृष्णिका सिंह मैदान में हैं।  गौरव और मोहम्मद फारुख भी मैदान में हैं लेकिन उनपर कोई बात भी नहीं कर रहा है।
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2014 में आइसा के प्रेसिडेंट रहे आशूतोष बताते हैं कि महिला देश का मुद्दा है। जेएनयू चुनाव हमेशा से देश की दशा और दिशा तय करता रहा है। देश की संसद ने भले ही महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण न दिया हो लेकिन जेएनयू की अपनी दिशा है और हम बताना चाहते हैं कि महिलाएं कदम कदम पर पुरुषों के साथ हैं लेकिन फिर भी समाज ने उन्हें हासिए पर रखा है।
 
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय - फोटो : social media
9 फरवरी में देशद्रोही नारे के बाद कैंपस की स्थिति बदल गई है। आमतौर पर जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव लेफ्ट बनाम लेफ्ट का रहा है। एबीवीपी लाख कोशिशों के बाद भी यहां अपना वर्चस्व नहीं जुटा पाया है। अब देखना ये है कि देशद्रोह का आरोप झेल चुके तत्कालीन कन्हैया कुमार, महासचिव रामा नागा और जेएनयू के ही एक अन्य छात्र उमर खालिद का जादू इस बार के चुनाव में कितना चल पाता है।

इस बार एआईएसएफ की तरफ से सीपीआई के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डी राजा की बेटी अपराजिता राजा को जेएनयू का कितना समर्थन मिलता है यह देखने की बात होगी। इसबार अध्यक्ष पद के लिए 7 उम्मीदवार मैदान में हैं जिसमें एक निर्दलीय हैं फारुख आलम। अपराजिता पिछले साल से काफी चर्चा में हैं इसलिए उनका  पलड़ा काफी भारी है। आपको याद होगा अपराजिता पर भी देशद्रोह का आरोप लगा था। अपराजिता जेएनयू में सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज में पीएचडी कर रही हैं और डीयू से भी छात्रसंघ के अध्यक्ष का चुनाव लड़ चुकी हैं।

कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई की तरफ से अध्यक्ष पद पर वृष्णिका सिंह मैदान में हैं. जबकि जोड़ तोड़ की राजनीति में आइसा, एसएफआई और डीएसएफ ने मिलकर अपनी लेफ्ट यूनिटी पैनल बनाया है। एआईएसएफ अध्यक्ष पद के साथ-साथ संयुक्त सचिव पद पर भी लड़ रहा है. इस पद के लिए एआईएसएफ की तरफ से मेहदी हसन मैदान में हैं. जबकि लेफ्ट कैडर हर बार की तरह भारी पलड़ा रखे हुए है और गीता कुमारी अध्यक्ष पद की दावेदार तो हैं ही साथ ही स्ट्रांग कैंडिडेट भी क्योंकि वो 7 साल से कैंपस में है और जेंडर सेंसटाइजेशन की  दो बार हेड रहने के साथ साथ काउंसिलर भी रह चुकी हैं।
 
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