सुप्रीम कोर्ट ने नहीं किया था कार्रवाई करने में समय का जिक्र
इसके बाद शनिवार को पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के अधिकारी और कर्मचारी भारी पुलिस बल के साथ सुबह चिखली गांव में रिवर विला परियोजना पर पहुंचे। यहां ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। नगर आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि नगर निगम ने बंगलों को ध्वस्त कर दिया, क्योंकि मानसून के दौरान ध्वस्तीकरण अभियान नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी ने भ्रम पैदा करने की कोशिश की है कि सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को निगम को कार्रवाई करने के लिए छह महीने का समय दिया था।
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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई के अपने फैसले में एनजीटी के आदेश को ही दोहराया है। एनजीटी ने ही 2024 में ध्वस्तीकरण का आदेश देते हुए पीसीएमसी को 6 महीने का समय दिया था। 17 मई को आदेशों का पालन करते हुए हमने सभी 36 अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया। अब बंगला मालिकों से पांच करोड़ रुपये की वसूली से संबंधित एनजीटी के आदेश के दूसरे भाग को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं शहर के सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे किसी भी खरीदारी से पहले उस क्षेत्र की जांच कर लें, जहां आवासीय परियोजना स्थित है, उसका लेआउट, अनुमोदन तथा समुचित जांच पड़ताल कर लें।
बंगले के मालिकों ने कहा कि उन्होंने और अन्य लोगों ने 2018 में मेसर्स जारे वर्ल्ड और मेसर्स वी स्क्वायर से भूखंड खरीदे थे। हमने सरकार की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करके भूखंडों को अपने नाम पर स्थानांतरित कर लिया। जब जमीन अवैध थी तो भी पीसीएमसी के कुछ अधिकारियों ने उन्हें निर्माण कार्य जारी रखने को कहा। एक बंगला मालिक ने कहा कि मैंने अपना बंगला बनाने में एक करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च किए हैं और मैं आज भी 68,000 रुपये की ईएमआई चुका रहा हूं। अगर पीसीएमसी ने पहले बंगले के निर्माण के बाद उसके खिलाफ़ कार्रवाई की होती, तो आज यह स्थिति नहीं आती।
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