छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं और अब सभी की निगाहें प्रदेश के 33 प्रतिशत आदिवासी वोटरों पर लगी हुई हैं।छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों में से 29 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं, ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियों का ध्यान इन पर है।
सरकार बनाने में ये अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। बड़े दलों के साथ-साथ छोटे राजनीतिक दल भी इन्हें अपनी ओर मिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।भारतीय जनता पार्टी जहां इन्हें लुभाने के लिए पीएम मोदी तक का सहारा ले रही है तो वहीं कांग्रेस सत्याग्रह के बहाने आदिवासी वोटरों को अपने से जोड़ने के काम में लगी हुई है।
इसके साथ ही वनाधिकार, ग्राम सभाओं का अधिकार जैसे मामले एक बार फिर चर्चा में हैं। एक और मुद्दा जो यहां कि राजनीति में बार-बार उठता रहता है वो है आदिवासी सीएम का बनना। इस प्रकार के मुद्दे को लेकर अजीत जोगी काफी सक्रिय नजर आते हैं।
आदिवासी वोटरों को ध्यान में रखते हुए सरगुजा और बस्तर जैसे आदिवासी बाहुल्य इलाके काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यही कारण है कि समाजवादी पार्टी ने आदिवासी वोटरों को ध्यान में रखते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ हाथ मिला लिया।
आम आदमी पार्टी व अन्य दल भी इस क्षेत्र में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी इस क्षेत्र में कई बड़ी रैलियां आयोजित करने वाली है।
विधानसभा सीट
कुल 90 सीट
सामान्य 51
एससटी 10
एसटी 29
एसटी की सीटों का हाल
में आगामी
पार्टी 2008 2013
भाजपा 19 10वोट बैंक
कांग्रेस 11 18
वोट बैंक
- कुल जनसंख्या 255.45 लाख
- अनुसूचित जनजाति 78.22 लाख
- अनुसूचित जाति 32.47 लाख