रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने कहा, ‘हमें गर्व है कि इन रेलगाड़ियों में पैदा होने वाले सभी बच्चे स्वस्थ्य हैं और उनकी मां भी ठीक हैं। हम इस बात से खुश हैं कि हम उनकी मदद कर सके।’
हालांकि, इन विशेष रेलगाड़ियों में बच्चे के जन्म की पहली घटना आठ मई को हुई जब गुजरात से अकेले बिहार जा रही ममता यादव ने बच्चे को जन्म दिया।
इसी प्रकार 13 मई को पिंकी यादव ने अहमदाबाद-फैजाबाद श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में आरपीएफ कर्मियों की मदद से बेटे को जन्म दिया। उन्हें उत्तर प्रदेश के कानपुर रेलवे स्टेशन पर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई लेकिन आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर करने की जरूरत पड़ी।
रेलवे के मुताबिक 23 वर्षीय ईश्वरी देवी ने हबीबगंज-बिलासपुर श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में गत रविवार को कर्मचारियों और महिला यात्रियों की मदद से बेटे को जन्म दिया। रेलवे ने अबतक करीब 2,800 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों का परिचालन किया है और इनमें बच्चों के जन्म से रोजमर्रा के तनाव से कुछ सुकून के पल मिले हैं।
चूंकि इन बच्चों का जन्म अंजान लोगों के बीच हुआ। इसलिए पहली बार रोने की उनकी आवाज रेलगाड़ी पर सवार कई लोगों ने सुनी। रविवार को उत्तर प्रदेश आने वाली विशेष रेलगाड़ी में जन्म लेने वाली एक बच्ची का नाम ‘ लॉकडाउन यादव’ रखा गया है।