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मोदी सरकार के 3 साल, बढ़ती बेरोजगारी से संघ भी चिंतित

Mon, 22 May 2017 10:53 PM IST
amarujala.com- Written by: संजय मिश्र
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Source
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संघ को भी अब बढ़ती बेरोजगारी की चिंता सताने लगी है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद संघ भी मान रहा है कि तीन साल के मोदी शासन में लोगों को उतना रोजगार नहीं मिला है, जितने दावे किए गए थे। ऊपर से वैश्विक आर्थिक संकट ने युवाओं के रोजगार छीनने शुरू कर दिए हैं। बढ़ती बेरोजगारी पीएम मोदी के भावी राजनीतिक सफर पर कोई ग्रहण न लगाए, इससे बचने के लिए संघ के संगठनों ने अभी से कवायद शुरू कर दी है। संघ के सहयोगी संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार को बेरोजगारी से निपटने के लिए अहम सुझाव भी दिए हैं।
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गुवाहाटी मंथन में स्वदेशी जागरण मंच ने कबूली बेरोजगारी की सच्चाई

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20—21 मई को गुवाहाटी में चले स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय कार्यसमिति की मंथन बैठक में मंच ने सच्चाई को स्वीकार किया है कि देश में बेरोजगारी की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। मंच ने प्रस्ताव पारित कर कहा है कि वर्तमान केंद्र सरकार का आधे से भी अधिक कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में वर्तमान राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक परिदृश्य का मूल्यांकन करने का यह उपयुक्त समय है। मंच ने कहा है कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुकी है, पर रोजगार सृजन अभी भी चुनौती बना हुआ है।

ताजे रिपोर्ट के मुताबिक रोजगार मात्र 1 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। यह एक शोचनीय स्थिति है। आई.टी. उद्योग में भी भारी रोजगार क्षरण और छंटनी हो रही है। रूकी हुई परियोजनाएं अभी भी शुरू नहीं हुई और एनपीए समस्या में भी सुधार नहीं है। हालांकि विमुद्रीकरण के बाद बैंकों के पास भारी मात्रा में धन एकत्र हुआ है लेकिन ऋणों में उठाव अभी शुरू नहीं हुआ है।
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बेरोजगारी से मुक्ति के लिए स्वदेशी मंत्र

सांकेतिक तस्वीर

बेरोजगारी से मुक्ति के लिए केंद्र को स्वदेशी मंत्र का ज्ञान देते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने केंद्र सरकार से देश में उत्पादित वस्तुओं को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने की मांग की है। इसके अलावा मंच ने सरकार से कहा है कि सरकारी नीति में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के बजाय वह घरेलू निवेश को प्रोत्साहन दे।

मंच का कहना है कि विश्व में बह रही विभूमंडलीकरण की हवा को ध्यान में रखकर अपने देश के आर्थिक ढांचे की सरकार रचना करें। भारत की युवा शक्ति का अपव्यय होने से रोकना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। भारत की भारी घरेलू मांग एक महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा रही है, इसलिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ का अवसर दिए बिना घरेलू मांग पर आधारित आर्थिक मॉडल बनाया जाए।
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