साल दर साल नेता और सरकारें देश में वीआईपी कल्चर को खत्म करने के वादे करती आई है, लेकिन सच कुछ और ही है। हाल में जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक कुछ 20 हजार वीआईपी के सुरक्षा के लिए प्रत्येक पर औसतन तीन पुलिसकर्मी को तैनात किया गया है।
जबकि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस वालों की कमी है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देशभर में तैनात कुल 19.26 लाख पुलिसकर्मियों में से 56,944 को 20,828 वीआईपी की सुरक्षा में लगाया गया है।
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इस हिसाब से एक वीआईपी की सुरक्षा में औसत 2.73 पुलिसकर्मी तैनात हैं। वहीं लक्ष्यद्वीप एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां किसी को पुलिस सुरक्षा नहीं दी गई है। वहीं आम आदमी की सुरक्षा में तैनात पुलिस में मामले भारत काफी पीछे है। यहां 663 आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए केवल एक पुलिसकर्मी मौजूद है।
हालांकि केंद्र सरकार ने वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए कुछ कदम जरूर उठाए, सरकार ने लाल बत्ती के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। बीपीआरडी के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा वीआईपी कल्चर उत्तर और पूर्वी भारत में है। इस मामले में बिहार का हाल सबसे बुरा है। यहां सबसे ज्यादा 3200 वीवीआईपी की सुरक्षा में 6,248 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है।
वहीं पश्चिम बंगाल में 2207 वीआईपी की सुरक्षा में 4233 पुलिसकर्मी को तैनात किया गया है। बंगाल में नियमों के तहत वीआईपी सुरक्षा के लिए सिर्फ 501 पुलिसकर्मियों की नियुक्ती का ही प्रावधान है।