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'पुलिसवाले' से जज की कुर्सी तक पहुंचे थे 2जी घोटाले में फैसला सुनाने वाले ओपी सैनी

Thu, 21 Dec 2017 05:46 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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यूपीए की सरकार गिराने वाले 2जी घोटाले के सभी आरोपियों को पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओ.पी.सैनी ने गुरुवार को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि इस मामले को साबित करने के लिए जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सुबूत नहीं हैं। इस केस में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा शामिल थे। बता दें कि इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला तक करार दिया जा चुका है।
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आइए जानते हैं फैसला सुनाने वाले जज ओपी सैनी के बारे में कुछ खास बातें

62 वर्षीय ओपी सैनी ने अपने करियर की शुरुआत 1981 में दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर के रूप में की थी। नौकरी के 6 साल बाद उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट की परीक्षा पास की। खास बात ये है कि उस साल वाले अकेले उम्‍मीदवार थे जिसने यह परीक्षा पास की।

मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले सैनी मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। न्यायिक हलके में उनकी छवि एक सख्त और ईमानदार न्यायाधीश की है, कई बार वह सीबीआई के बड़े अधिकारियों को भी सख्त चेतावनी जारी कर चुके हैं। खास बात ये है कि दशक भर में ‌सीबीआई ने जिन बड़े मामलों को हाथ में लिया है उनकी सुनवाई सैनी की कोर्ट में ही हुई, जहां से कई बड़े दिग्‍गजों को जेल भेजा जा चुका है। 
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तमाम दलीलों के बाद भी कनीमोझी को नहीं दी थी जमानत

- फोटो : PTI
सैनी को असली पहचान 2011 में मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2जी केस में गठित स्पेशल कोर्ट के लिए जज नियुक्त किया। हालांकि इससे पहले भी कुछ अहम मामलों में उनके फैसलों से उन्हें पहचान मिल चुकी थी। जिनमें नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) रिश्वत और कॉमनवेल्थ घोटाले का फैसला शामिल है।

2जी केस में उनके सख्त फैसलों की बानगी तब मिलनी शुरू हुई जब उन्होंने तब केंद्र की सत्ता में साझीदार और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि की बेटी कनिमोझी की जमानत याचिका यह कहकर खारिज कर दी थी कि बाहर आने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। जबकि कनिमोझी ने यह कहकर याचिका दायर की थी कि वह एक महिला हैं और उनके छोटे बच्चे हैं जिनकी परवरिश उन्हें करनी है। लेकिन उनकी ये दलील सैनी के सामने नहीं चल सकी।

वहीं पिछले साल 22 दिसंबर को ओपी सैनी ने लाल किला हमला मामले में मुख्य आरोपी को मौत की सजा और अन्य 6 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बता दें कि आरोपियों ने आर्मी कैंप में हमला किया था जिसमें तीन जवान शहीद हो गए थे। इस फैसले ने भी उन्हें एक सख्त जज के तौर पर पहचान दिलाई।
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