ईडी ने मामले में मुख्य आरोपी भावेश अशोकभाई पटेल व अन्य के खिलाफ अहमदाबाद पुलिस की एफआईआर का संज्ञान लिया और मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की है। ईडी ने पाया कि आरोपी ने कनाडा स्थित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अवैध रूप से अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों के लिए प्रवेश की व्यवस्था की थी।
प्रवर्तन निदेशालय कनाडा की सीमा से भारतीयों की तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच में पाया कि 262 कनाडाई कॉलेजों ने मानव तस्करी करने वाले दो भारतीय गिरोहों से करार किया था। यह जांच गुजरात के डिंगुचा गांव के रहने वाले चार सदस्यीय भारतीय परिवार की मौत से जुड़ी है। चारों की 19 जनवरी, 2022 को अवैध रूप से कनाडा-अमेरिका सीमा पार करने की कोशिश करते समय अत्यधिक ठंड से मौत हो गई थी।
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ईडी ने इस मामले में मुख्य आरोपी भावेश अशोकभाई पटेल व अन्य के खिलाफ अहमदाबाद पुलिस की एफआईआर का संज्ञान लिया और मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की है। ईडी ने पाया कि आरोपी ने कनाडा स्थित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अवैध रूप से अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों के लिए प्रवेश की व्यवस्था की थी। ऐसे लोगों को कनाडाई छात्र वीजा पर वहां पहुंचाया गया और उसके बाद कॉलेज में दाखिला दिलाने के बजाय अवैध रूप से अमेरिका-कनाडा सीमा पार करा दी गई। ईडी ने आरोप लगाया कि इसके मद्देनजर, कनाडा स्थित कॉलेजों से प्राप्त शुल्क को व्यक्तियों के खाते में वापस भेज दिया गया।
देशभर में सक्रिय हैं दोनों गिरोह के 800 से अधिक गुर्गे
ईडी ने जांच में पाया कि कनाडा के 112 कॉलेजों ने एक संस्था और 150 से अधिक ने दूसरी संस्था के साथ समझौता किया है। इसके अलावा, यह पता चला कि गुजरात में लगभग 1700 एजेंट और पार्टनर और पूरे देश में अन्य संस्थाओं के लगभग 3500 एजेंट और पार्टनर हैं जिनमें से 800 से अधिक गुर्गे सक्रिय हैं।