26/11 हमले में शहीद हुए आईपीएस अधिकारी अशोक काम्टे की पत्नी को भ्रामक जानकारी देने के मामले में बांबे हाईकोर्ट ने उन्हें अलग से आवेदन करने की छूट दी है। अदालत ने कहा कि अगर वह इस मामले में पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया के खिलाफ न्यायिक जांच चाहती हैं, तो वह अलग से आवेदन कर सकती हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।
इसी हफ्ते की शुरुआत में न्यायाधीश वीएम कानडे और एमएस कार्णिक की पीठ ने अशोक काम्टे की पत्नी विनीता काम्टे को यह सुझाव दिया था। अदालत का यह सुझाव महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें सरकार ने राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मारिया के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था।
दरअसल विनीता काम्टे ने सूचना के अधिकार के तहत मुंबई हमले की रात कंट्रोल रूम और उस वैन के बीच हुई वायरलेस बातचीत का पूरा ब्यौरा मांगा था, जिसमें उनके पति के साथ ही एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे और एंकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालसकर मौजूद थे। विनीता को 2009 और 2010 में जानकारी मुहैया की गई, लेकिन उसमें कई विसंगतियां थीं।
सके बाद विनीता ने सीआईसी के पास पहुंचकर पुलिस को पूरी जानकारी देने के लिए आदेश देने का आवेदन किया था। कई बार निर्देश देने के बाद भी जब पुलिस ने ऐसा नहीं किया, तो सीआईसी ने जांच का आदेश दे दिया।