फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bombay High Court: 26/11 आतंकी हमला केस में बरी फहीम अंसारी की दलील- ऑटो चलाना चाहते हैं; सरकार से जवाब तलब

Wed, 19 Mar 2025 02:43 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को 26/11 आतंकी हमलों के मामले में बरी किए गए फहीम अंसारी की याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। फहीम अंसारी द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि उसे ऑटो रिक्शा चलाने के लिए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी) नहीं दिया गया, जो कि उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को 26/11 आतंकी हमलों के मामले में बरी किए गए फहीम अंसारी की याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अंसारी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उसने अपनी आजीविका के लिए ऑटो रिक्शा चलाने के लिए 'पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट' मांगा था। मामले में अतिरिक्त सरकारी वकील मनकुंवर देशमुख ने कोर्ट को बताया कि राज्य को अंसारी द्वारा किए गए दावों की पुष्टि करनी होगी। उन्होंने इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने उनकी बात मानी और मामले की सुनवाई 3 अप्रैल को तय की।

फहीम अंसारी को किया गया था बरी

विज्ञापन

बता दें कि मई 2010 में, एक विशेष अदालत ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान के आतंकवादी अजमल कसाब को दोषी ठहराया था। हालांकि, इस मामले में दो भारतीय आरोपियों, फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया था।

इन दोनों पर आरोप था कि वे 26 नवंबर, 2008 को हुए इस नृशंस आतंकी हमले के सह-षड्यंत्रकारी थे। साथ ही आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की मदद कर रहे थे, जिसकी वजह से 166 लोग मारे गए और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे, इसलिये उन्हें बरी कर दिया गया।

ये भी पढ़ें:- Gaza Israel Airstrike: गाजा में इस्राइली हमले पर राजदूत अजार बोले- हमास कूटनीतिक रास्ता अपनाए या भुगते अंजाम

आजीविका के लिए ऑटो चलाना चाहता है अंसारी

विज्ञापन

आजीविका के लिए फहीम अंसारी ने एक याचिका दायर किया था। इसमें उन्होंने कहा कि उसे ऑटो रिक्शा चलाने के लिए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी) नहीं दिया गया, जो कि उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अंसारी ने इसे मनमाना, अवैध और भेदभावपूर्ण फैसला बताया और कहा कि सिर्फ इसलिए कि उस पर 26/11 आतंकी हमले के मामले में मुकदमा चलाया गया था, उसे रोजगार के अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता। खासकर तब जब उसे सभी अदालतों ने बरी कर दिया है। अंसारी ने अधिकारियों से उसे यह सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश देने की मांग की है।

अंसारी ने की सर्टिफिकेट की मांग
गौरतलब है कि 2019 में जेल से रिहा होने के बाद, अंसारी ने मुंबई में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम किया, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण वह बंद हो गया। इसके बाद, उसे मुंब्रा में दूसरी नौकरी मिली, लेकिन आय कम होने के कारण उसने ऑटो-रिक्शा चलाने का फैसला किया और 1 जनवरी 2024 को लाइसेंस प्राप्त किया। उसने पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया, लेकिन जवाब नहीं मिला।

ये भी पढ़ें:- Railway: पूर्वोत्तर में रेलवे के बढ़ते कदम, महाप्रबंधक ने किया जिरिबाम-इंफाल रेलवे लाइन परियोजना का निरीक्षण

विज्ञापन


इसके बाद जब उसने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन किया, तो उसे बताया गया कि उसे यह प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता क्योंकि उस पर लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य होने का आरोप था। हालांकि, अंसारी और उसके साथी सबाउद्दीन अहमद को सत्र न्यायालय ने बरी कर दिया था, क्योंकि अदालत ने कहा था कि उनके द्वारा तैयार किए गए नक्शे ऑनलाइन भी उपलब्ध थे और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले थे।

ये भी देखें

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें