बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को 26/11 आतंकी हमलों के मामले में बरी किए गए फहीम अंसारी की याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अंसारी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उसने अपनी आजीविका के लिए ऑटो रिक्शा चलाने के लिए 'पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट' मांगा था। मामले में अतिरिक्त सरकारी वकील मनकुंवर देशमुख ने कोर्ट को बताया कि राज्य को अंसारी द्वारा किए गए दावों की पुष्टि करनी होगी। उन्होंने इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने उनकी बात मानी और मामले की सुनवाई 3 अप्रैल को तय की।
फहीम अंसारी को किया गया था बरी
इन दोनों पर आरोप था कि वे 26 नवंबर, 2008 को हुए इस नृशंस आतंकी हमले के सह-षड्यंत्रकारी थे। साथ ही आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की मदद कर रहे थे, जिसकी वजह से 166 लोग मारे गए और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे, इसलिये उन्हें बरी कर दिया गया।
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आजीविका के लिए ऑटो चलाना चाहता है अंसारी
अंसारी ने की सर्टिफिकेट की मांग
गौरतलब है कि 2019 में जेल से रिहा होने के बाद, अंसारी ने मुंबई में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम किया, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण वह बंद हो गया। इसके बाद, उसे मुंब्रा में दूसरी नौकरी मिली, लेकिन आय कम होने के कारण उसने ऑटो-रिक्शा चलाने का फैसला किया और 1 जनवरी 2024 को लाइसेंस प्राप्त किया। उसने पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया, लेकिन जवाब नहीं मिला।
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