यह खबर स्वास्थ्य जांच के नाम पर होने वाली उस लापरवाही को उजागर कर रही है जो सोचने पर मजबूर कर देती है कि आप जिनपर भरोसा करते हैं, वो आपका कितना नुकसान कर देते हैं। ऐसा ही एक मामला है गाजियाबाद का जहां डॉक्टर के गलत इलाज से एक महिला की जान पर आफत बन आई।
द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की एक महिला महीनों से इसलिए अस्पतालों और कंज्यूमर कोर्ट के चक्कर काटती रही कि उसके होने वाले गलत इलाज का सही फैसला हो सके। दरअसल, महिला को टीबी के लक्षण दिखे तो वह गाजियाबाद के वैशाली स्थित अस्पताल पुष्पांजलि पहुंची। यहां डॉक्टर शारदा जैन ने महिला को उसके स्वास्थ्य संबंधित सलाह दी। इसमें मां बनने के प्रारंभिक सवालों को लेकर भी कई उत्तर शामिल हैं। उन्होंने महिला को टीबी की दवाइयां लेने से पहले गर्भ धारण करने की सलाह दी। नवविवाहित महिला अपने पहले बच्चे के लिए चिंतित थी तो उसने इस विषय पर डॉक्टर जैन से सवाल किया था। इसके बाद डॉक्टर जैन द्वारा मिले परामर्श पर महिला निश्चिंत थीं।
थोड़े समय महिला अपने टीबी के इलाज संबंधित व्यस्त रहीं, वो दिन भी आ गया जब महिला गर्भवती हुई लेकिन डॉक्टरी परामर्श के बावजूद भ्रूण ठीक तरह से विकसित ही नहीं हुआ। महिला के स्वास्थ्य से सिर्फ यही खिलवाड़ नहीं हुआ। इसके बाद महिला ग्रेटर कैलाश के फॉर्टिस अस्पताल पहुंची, यहां उसने डॉक्टर नीना सिंह से परामर्श लेना शुरू किया। डॉक्टर नीना ने महिला की समस्या कम करने की बजाए और बढ़ा दी। यहां तक कि केस बिगड़ने पर डॉक्टर नीना ने सॉरी बोल दिया और दोबारा प्रयास के लिए अपनी फीस माफ कर ली। लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि महिला अब शायद ही मां बन पाए।
दरअसल डॉक्टर नीना ने महिला का अल्ट्रासाउंड किया। इसमें उसे महिला के गर्भ का भ्रूण ही नहीं दिखा। फिर क्या था जब इस गलती से पर्दा उठा तो डॉक्टर नीना ने दोबारा अल्ट्रासाउंड की बात कही और महिला की संतुष्टि के लिए अपनी फीस माफ कर दी। इसके बाद ऐसा अल्ट्रासाउंड हुआ कि महिला के गर्भाशय में इतनी गंभीर चोटें आईं कि अब महिला के मां बनने पर संशय ही है।
राहत की बात यह है कि कंज्यूमर कोर्ट के दबाव पर अस्पताल ने पीड़ित महिला को इसके लिए 25 लाख का मुआवजा दिया है। डॉक्टर नीना या शारदा अपने पेशे में नियमित रूप से काम कर रही हैं। किसी ने उनकी इस लापरवाही पर शायद ही फिर सवाल उठाया हो।