फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

2030 Commonwealth Games: गुजरात में जमीन वापस लेने की कार्रवाई पर 'सुप्रीम' रोक, आसाराम ट्रस्ट को मिली राहत

Mon, 27 Apr 2026 06:21 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

2030 Commonwealth Games: सुप्रीम कोर्ट से आसाराम ट्रस्ट को बड़ी राहत मिली है। गुजरात में आसाराम ट्रस्ट से 45,000 वर्ग मीटर जमीन वापस लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अब इस मामले में 4 मई को सुनवाई होगी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए विवादित जमीन मामले में 4 मई तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा है। यह मामला स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के अहमदाबाद स्थित आश्रम की जमीन से जुड़ा है, जिसे गुजरात सरकार 2030 राष्ट्रमंडल खेल 2030 की तैयारी के लिए लेना चाहती है। करीब 45,000 वर्ग मीटर जमीन, जहां यह आश्रम बना हुआ है, अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास स्थित है। सरकार इस जमीन पर सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना पर काम कर रही है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - मंगलूरू ब्लास्ट: मंदिर में रखने से पहले ही फट गया था कुकर बम, साढ़े तीन साल बाद आतंकी शारिक को 10 साल की सजा

मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा आसाराम ट्रस्ट
इस मामले में 'संत श्री आसाराम ट्रस्ट' ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ट्रस्ट ने गुजरात उच्च न्यायालयके 17 अप्रैल के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें हाई कोर्ट ने सरकार द्वारा जमीन वापस लेने के फैसले को सही ठहराया था। सरकार का आरोप है कि ट्रस्ट ने जमीन की लीज की शर्तों का उल्लंघन किया और आसपास की सरकारी जमीन पर भी कब्जा किया।
विज्ञापन


सुनवाई के दौरान बेंच ने क्या की टिप्पणी?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल हैं, ने पहली नजर में कहा कि ऐसा लगता है कि ट्रस्ट को सही तरीके से नोटिस नहीं दिया गया था। कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज तीन दिन के भीतर पेश करे, जबकि ट्रस्ट को भी जवाब देने के लिए समय दिया गया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आश्रम की तरफ से कई उल्लंघन हुए हैं और बिना अनुमति के 30 से ज्यादा इमारतें बनाई गई हैं। वहीं ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि जमीन आश्रम, सामाजिक कार्यों और स्कूल के लिए दी गई थी और किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - शुभेंदु अधिकारी को कलकत्ता HC से बड़ी राहत: उम्मीदवारी रद्द करने वाली याचिका खारिज; ममता के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव

'अगली सुनवाई से पहले न हो कोई तोड़फोड़ या कार्रवाई'
कोर्ट ने साफ किया कि अगली सुनवाई (4 मई) तक जमीन पर कोई भी तोड़फोड़ या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि सरकार की ओर से यह भरोसा भी दिया गया कि तब तक एक भी ईंट नहीं हटाई जाएगी। गौरतलब है कि आसाराम इस समय मेडिकल आधार पर जमानत पर हैं, जबकि उन्हें नाबालिग से दुष्कर्म समेत कई मामलों में उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी, जहां कोर्ट तय करेगा कि जमीन पर सरकार का दावा सही है या ट्रस्ट का।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें