कांग्रेस पार्टी के उदयपुर नवसंकल्प शिविर के बाद पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी ने मंगलवार को कई नेताओं को नई जिम्मेदारी सौंप दी है। 'पॉलिटिकल अफेयर ग्रुप' का गठन किया गया है। इसकी अध्यक्षता खुद सोनिया गांधी करेंगी। इसके अलावा 'भारत जोड़ो यात्रा' के समन्वय के लिए 'टास्क फोर्स 2024' और 'सेंट्रल प्लानिंग ग्रुप' बनाया गया है। इन सभी ग्रुपों का मकसद किसी भी तरह से 2024 में कांग्रेस पार्टी को बेहतर स्थिति में लाना है। कांग्रेस पार्टी की राजनीति को बारीकि से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक रशीद किदवई कहते हैं कि मोदी की तर्ज पर अपने नेताओं को 'कड़वी' दवा देने से कांग्रेस चूक गई है। अब सवाल ये है कि क्या 2024 में कांग्रेस पार्टी के 'चले हुए कारतूस' कोई करिश्मा दिखा सकेंगे या नहीं। कांग्रेस पार्टी के लिए कई अवसरों पर परेशानी का सबब बने असंतुष्ट नेताओं का समूह 'जी 23' का निवारण तो अभी तक नहीं हो सका है। 'पॉलिटिकल अफेयर ग्रुप' का गठन, इसमें कोई नया प्रयोग नहीं है, लंबे समय से चला आ रहा पुराना ढर्रा ही तो है। इससे पार्टी में बदलाव होगा, ये गुंजाइश कम ही है।
'पॉलिटिकल अफेयर ग्रुप' का गठन
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उदयपुर में आयोजित तीन दिवसीय चिंतन शिविर के बाद 'पॉलिटिकल अफेयर ग्रुप' का गठन किया है। चिंतन शिविर में कांग्रेस पार्टी ने कई प्रस्तावों पर मुहर लगाई थी। जैसे वन फैमिली-वन टिकट, संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना और देशभर में पदयात्रा निकालने जैसे अहम फैसले लिए गए थे। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने कहा था, हम फिर जनता के बीच जाएंगे। लोगों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करेंगे। इसके लिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को कड़ी मेहनत करनी होगी। लेखक रशीद किदवई के मुताबिक, पार्टी में बदलाव तब आता है, जब उसके निर्णयों में नयापन हो। अधिकांश नेता ऐसे हैं जो हार गए थे, उन्हें ही विभिन्न कमेटियों में जगह दे दी गई है। इससे पार्टी का जनाधार नहीं बढ़ेगा। जब लोग नहीं जुड़ेंगे तो बदलाव की उम्मीद करना भी बेमानी है। कमेटियों में असंतुष्ट नेता भी शामिल हैं। ये नेता अपनी जिम्मेदारी को निभाने की बजाए, राज्यसभा में जाने को आतुर रहेंगे। ऐसे में पार्टी के सामने दोबारा से एक नई मुसीबत आ खड़ी होगी। चले हुए कारतूसों का इस्तेमाल कैसे करेंगे।
इन चेहरों को तरजीह
कांग्रेस की पीएसी में सांसद राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, मल्लिकार्जुन खड़गे, अम्बिका सोनी, दिग्विजय सिंह, गुलाम नबी आजाद, आनन्द शर्मा व जितेंद्र सिंह नेताओं को जगह दी गई है। इसी तरह से 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए जो टास्क फोर्स बनाई गई है, उसमें मुकुल वासनिक, पी. चिदंबरम, केसी वेणुगोपाल, अजय माकन, प्रियंका गांधी, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला और सुनील कनगोलु का नाम शामिल किया गया है। भारत जोड़ो यात्रा के समन्वय की जिम्मेदारी के लिए जो सेंट्रल प्लानिंग ग्रुप, बनाया गया है, उसमें भी वही पुराने चेहरे हैं। बतौर रशीद किदवई, दिग्विजय सिंह को क्या सोचकर पार्टी ने जिम्मेदारी दी है, मालूम नहीं। कुर्सी के लिए राजस्थान में पार्टी को एक बड़े संकट में धकेलने वाले सचिन पायलट पर भी भरोसा जताया गया है। शशि थरूर, केजे जॉर्ज, जोथी मानी, रंवीत सिंह बिट्टू, जीतू पटवारी, प्रद्युत बोलदोलोई और सलीम अहमद को जिम्मेदारी मिल गई है। बतौर किदवई, इन कमेटियों के गठन में 'दबाव' साफ झलकता है।
किसका चेहरा होगा आगे?
कांग्रेस पार्टी को 2024 के लिए सलाह देने वाले प्रशांत किशोर की कई बातें बड़ी व्यावहारिक रही हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया है। सुनील कनगोलु, को प्रशात किशोर का सहयोगी बताया जाता है। जिन लोगों पर कांग्रेस कई बार दांव लगा चुकी है, अब 2024 के लिए भी उन्हें ही आगे लाना, एक समझदारी भरा कदम नहीं है। भाजपा ने अगर मार्गदर्शन मंडल बनाया है तो उसकी कुछ वजह रही है। जैसे भाजपा 2009 का लोकसभा चुनाव हारी तो उसके बाद पार्टी ने कई बड़े बदलाव किए थे। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को साइड लाइन किया गया था। विरोध के बावजूद भाजपा नेताओं को कड़वी दवा पीने के लिए मजबूर होना पड़ा था। रशीद किदवई कहते हैं कि कांग्रेस में जब सभी कमेटियां गठित कर दी गई हैं, तो पार्टी का नया अध्यक्ष क्या करेगा। यात्रा में किसका चेहरा आगे रहेगा। महात्मा गांधी ने यात्रा की थी और सुनील दत्त ने भी यात्रा की थी। क्या कांग्रेस पार्टी के मौजूदा नेता वैसी यात्रा निकालकर लोगों को अपने साथ जोड़ पाएंगे। वह भी महज डेढ़ साल की अवधि में। कांग्रेस पार्टी को पहले यह तय करना चाहिए था कि अध्यक्ष कौन होगा, नेता कौन होगा। क्या ये दोनों पद, गांधी परिवार के पास रहेंगे या इस खानदान से बाहर के किसी नेता को पार्टी में आगे आने का मौका मिलेगा।
आजाद और थरूर को भी जगह
बता दें कि असंतुष्ट खेमे के दो नेता गुलाम नबी आजाद और शशि थरूर, को प्लानिंग टीम में जगह दी गई है। बतौर रशीद किदवई, प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के चिंतन शिविर को असफल बताया था। इसमें कुछ गलत नहीं था। प्रशांत किशोर ने उसकी वजह भी बताई थी। प्रशांत किशोर ने कहा था, पार्टी अध्यक्ष सहित विभिन्न जिम्मेदारियों के लिए एक तय कार्यकाल हो। ऐसा नहीं हो कि एक ही व्यक्ति वर्षों से उस पद पर बैठा है। अगर 2024 में भाजपा को टक्कर देनी है तो उसके लिए कांग्रेस पार्टी को 15 हजार ऐसे नेता तैयार करने होंगे, जो आम कार्यकर्ताओं से जुड़े रहे हों। जिन्हें जनता पहचानती हो और समझती हो। किदवई कहते हैं कि प्रशांत किशोर का यह सुझाव बिल्कुल सही था। कांग्रेस एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी है, इसमें कोई शक नहीं। हर राज्य में उसका संगठन है। इसके बावजूद प्रभावी रणनीति तैयार करने में कांग्रेस पार्टी चूक जाती है। पार्टी में एक पद, एक आदमी का नियम लागू हो। पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष या उप प्रधान गांधी परिवार से बाहर के किसी नेता को बनाया। जब कार्यकर्ताओं को यह ही नहीं मालूम कि पार्टी में किसकी चलती है। कौन से नेता मुखौटे वाले हैं और कौन से काम करने वाले। जब तक यह असमंजस रहेगा, न तो आम लोग पार्टी से जुड़ेंगे और न ही कार्यकर्ता। भाजपा को टक्कर देनी है तो कांग्रेस पार्टी को सख्त फैसले लेने होंगे।