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एंटीलिया बम कांड: सचिन वाझे को मिली जमानत, कोर्ट ने कहा- यूएपीए के तहत आतंकी कृत्य का प्रथम दृष्टया मामला नहीं

Tue, 29 Sep 2026 03:53 PM IST
पवन पांडेय पीटीआई, मुंबई

सार

मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने 2021 एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन हत्या मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्य का प्रथम दृष्टया मामला साबित नहीं हुआ औप अंबानी परिवार के आतंकित होने का भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
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एंटीलिया बम कांड: सचिन वाझे को मिली जमानत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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2021 के एंटीलिया बम कांड और कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने मंगलवार को पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष वाझे के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवाद से जुड़ा प्रथम दृष्टया मामला साबित करने में नाकाम रहा है। विशेष सत्र न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे यह माना जा सके कि एंटीलिया के पास विस्फोटक से भरी गाड़ी मिलने के बाद अंबानी परिवार किसी तरह आतंकित हुआ था।
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एंटीलिया के पास मिली थी विस्फोटक से भरी एसयूवी
दरअसल, 25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास ‘एंटीलिया’ के पास एक एसयूवी खड़ी मिली थी। इसमें विस्फोटक सामग्री और धमकी भरा संदेश मिला था। यह गाड़ी कारोबारी मनसुख हिरेन के कब्जे में थी। इसके कुछ दिन बाद 5 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन का शव पड़ोसी ठाणे जिले की एक खाड़ी में मिला था। इसके बाद मामले की जांच में सचिन वाझे समेत कई लोगों के नाम सामने आए।

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अंबानी परिवार के किसी सदस्य का बयान क्यों नहीं लिया?
अदालत ने यूएपीए लगाने के लिए एनआईए की ओर से पेश किए गए सबूतों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अंबानी परिवार के किसी सदस्य का बयान तक दर्ज नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि इस घटना से परिवार के सदस्यों के मन में आतंक पैदा हुआ था। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि अंबानी परिवार वास्तव में किसी तरह आतंकित हुआ था। कोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद भी अंबानी परिवार का रोजमर्रा का कारोबार प्रभावित होता हुआ दिखाई नहीं देता।

गाड़ी में मिले विस्फोटक को लेकर भी सवाल
अदालत ने यह भी कहा कि एंटीलिया के पास खड़ी एसयूवी में जिलेटिन की छड़ें मिली थीं, लेकिन उनमें डेटोनेटर नहीं थे। कोर्ट के अनुसार, इस स्थिति में वे विस्फोट करने में सक्षम नहीं थीं। अदालत ने माना कि यूएपीए की धारा 15 के तहत किसी कृत्य को आतंकवादी कृत्य मानने के लिए जरूरी तत्वों को अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं कर पाया।

मनसुख हिरेन की मौत हत्या, लेकिन आतंकवादी कृत्य का सीधा नतीजा नहीं
मनसुख हिरेन की मौत के मामले में अदालत ने कहा कि यह हत्या थी, लेकिन इसे सीधे तौर पर किसी आतंकवादी कृत्य का परिणाम नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि हिरेन की हत्या भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत एक स्वतंत्र अपराध है। ऐसे अपराध पर यूएपीए के तहत लागू होने वाली कड़ी जमानत शर्तें सीधे लागू नहीं होतीं।
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एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत
इन टिप्पणियों के आधार पर विशेष अदालत ने सचिन वाझे की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। हालांकि, अभियोजन पक्ष का आरोप है कि सचिन वाझे और अन्य आरोपियों ने फरवरी-मार्च 2021 के दौरान एक ‘आतंकवादी गिरोह’ बनाया और आपराधिक साजिश रची थी। कोर्ट के ताजा आदेश में इन आरोपों को प्रथम दृष्टया यूएपीए के तहत पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं माना गया।
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