जजों की नियुक्ति के चलते उपजे कड़वाहट को दूर करना आने वाले वर्ष में न्यायपालिका और कार्यपालिका का मुख्य मकसद होगा। हालांकि टकराव इस कदर बढ़ गया है कि निकट भविष्य में इसके थमने की संभावना कम ही है। जजों की कमी के लिए न्यायपालिका और कार्यपालिका द्वारा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का चल रहा सिलसिला पूरे चरम पर है।
मोदी सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में हो रही देरी के लिए वह जिम्मेदार नहीं है। वहीं भारत केप्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर न केवल अदालती कार्यवाही केदौरान बल्कि कई अन्य मंचों पर सरकार को उदासीनता पर नाराजगी जता चुके हैं। प्रधान न्यायाधीश तो इसे लेकर कई बार भावुक भी हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केसाथ साझा कर रहे मंच पर प्रधान न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री से सीधे तौर पर इस संबंध में कुछ करने केलिए कहा।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर तीन जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ऐसे में न्यायपालिका और कार्यपालिका केरिश्तों में आई कड़वाहट खत्म या कम करने की जिम्मेदारी अगले चीफ जस्टिस जेएस खेहर पर होगी। सरकार का पक्ष है कि दिसंबर, 2015 केबाद सुप्रीम कोर्ट में जज की नियुक्ति केलिए अब तक कोई सिफारिश नहीं आई।