तकरीबन तीन दशक से जयललिता की परछाई रहने वाली और परदे के पीछे अहम फैसलों की मुख्य किरदार वीके शशिकला को बृहस्पतिवार को अन्नाद्रमुक का महासचिव बनाया गया। यह निर्णय पार्टी महासभा की बैठक में उनकी अनुपस्थिति में ही किया गया जिसे उन्होंने तत्काल स्वीकार कर लिया।
अन्नाद्रमुक की महासभा की बैठक में मुख्यमंत्री ओ. पन्नीर सेल्वम सहित सभी शीर्ष नेता मौजूद थे। पार्टी की नीति निर्धारण की इस शीर्ष बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह फैसला भी किया गया कि जयललिता के निधन के बाद पार्टी संचालन के सभी अधिकार चिनम्मा को सौंपे जाएं। जयललिता के उत्तराधिकारी को लेकर पार्टी में चल रही सुगबुगाहट के बावजूद परिषद ने सभी अटकलें खारिज करते हुए चिनम्मा को यह पद सौंपा है।
पन्नीर सेल्वम के नेतृत्व में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने जयललिता के पोस गार्डन स्थित आवास पर शशिकला से मुलाकात की और उन्हें पार्टी के निर्णय से अवगत कराया। मुख्यमंत्री के साथ लोकसभा में पार्टी के उप नेता एम. थम्बीदुरई और इडापड्डी के. पलानिसामी सहित अन्य नेताओं ने उन्हें पार्टी के पारित प्रस्तावों की एक प्रति सौंपी।
जयललिता की पसंदीदा हरे रंग की साड़ी पहनी शशिकला इस मौके पर भावुक हो गईं और उन्होंने इस प्रति को जयललिता की तस्वीर के आगे रखते हुए पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शशिकला के साथ उनके कुछ रिश्तेदार भी मौजूद थे। ‘चिनम्मा अमर रहे’ के नारों की गूंज के बीच शशिकला ने नेताओं और महासभा के सदस्यों से कहा कि वह काडर और नेताओं के विचारों का सम्मान करते हुए यह फैसला स्वीकार करती हैं।