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शरद पवार का खुलासा, शिवसेना को भाजपा से दूर रखने के लिए चली थी चाल

Mon, 13 Jul 2020 06:19 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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उद्धव ठाकरे-शरद पवार (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार को एक बड़ा खुलासा किया। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए 2014 में भाजपा को बाहर से समर्थन की पेशकश को उन्होंने एक राजनीतिक चाल बताया। पवार ने कहा कि उनकी पेशकश का मकसद शिवसेना को उसके उस समय के सहयोगी दल से दूर रखना था। पवार ने स्वीकार किया कि उन्होंने भाजपा और शिवसेना के बीच दूरियां बढ़ाने के लिए कदम उठाए। लंबे समय से सहयोगी रही भाजपा और शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद साझा करने के मुद्दे पर पिछले साल के राज्य विधानसभा चुनावों के बाद राहें जुदा कर ली थीं।

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पवार ने कहा कि पिछले साल के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा नेताओं ने राज्य में देवेंद्र फडणवीस सरकार को समर्थन देने के लिए उनसे संपर्क किया था। मगर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि राकांपा भाजपा के साथ नहीं जाएगी और अगर संभव होगा तो वह शिवसेना के साथ सरकार बनाएगी या विपक्ष में बैठेगी। शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सत्तारूढ़ महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के गठन में मुख्य भूमिका निभाने वाले पवार ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में एक साक्षात्कार में कहा, 'भाजपा को इस बात में यकीन नहीं है कि गैर भाजपा दलों को लोकतांत्रित व्यवस्था में काम करने का अधिकार है।'

नहीं चाहता था कि शिवसेना और भाजपा साथ आएं

तीन हिस्सों वाली साक्षात्कार श्रृंखला का अंतिम हिस्सा मराठी दैनिक समाचार पत्र में सोमवार को प्रकाशित हुआ। पहली बार, किसी गैर शिवसेना नेता को प्रकाशन की मैराथन साक्षात्कार श्रृंखला में जगह दी गई है। पवार ने कहा, 'मैंने (2014 के विधानसभा चुनावों के बाद) जान-बूझकर बयान दिया था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि शिवसेना और भाजपा साथ आए।'

जब मुझे एहसास हुआ कि चुनाव के बाद गठबंधन की संभावना बन रही है, तो मैंने बयान दिया जिसमें घोषणा की कि हम भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन उसने काम नहीं किया। शिवसेना सरकार में शामिल हो गई और गठबंधन सरकार ने कार्यकाल पूरा किया। 

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बयान एक राजनीतिक चाल थी

दिग्गज नेता ने कहा कि उनका मानना था कि महाराष्ट्र में भाजपा को सत्ता में आने देना शिवसेना और अन्य दलों के हित में नहीं था। उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा (2014 में) सत्ता में थी और अगर वह महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ पार्टी बनती है तो यह शिवसेना के लिए नुकसान होगा। भाजपा नहीं मानती कि किसी गैर भाजपाई पार्टी को लोकतांत्रिक व्यवस्था में काम करने का अधिकार है। मुझे पता था कि सभी अन्य दलों को खतरा है। बाहर से समर्थन देने वाला बयान एक राजनीतिक चाल थी। पवार ने कहा, ‘मैं मानता हूं कि मैंने भाजपा और शिवसेना के बीच दूरी बढ़ाने के लिए कदम उठाए।' 

पवार ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावे से इनकार किया कि वह (पवार) पिछले साल सरकार बनाने के लिए भाजपा के साथ बातचीत कर रहे थे और बाद में यू-टर्न ले लिया। उन्होंने कहा कि कुछ भाजपा नेताओं ने सरकार बनाने को लेकर मुझसे और मेरे सहयोगियों से बातचीत की थी और कहा था कि वह शिवसेना को शामिल नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि चूंकि मेरे प्रधानमंत्री के साथ अच्छे रिश्ते हैं, इसलिए उन्हें हस्तक्षेप करना चाहिए और मुझे अपनी सहमति देनी चाहिए। 

पवार ने कहा कि इसलिए, मुझे और मेरी पार्टी को लेकर किसी तरह के भ्रम की स्थिति या अवधारणा से बचने के लिए, मैंने संसद भवन में प्रधानमंत्री के कक्ष में उनसे मुलाकात की और उन्हें बताया कि राकांपा भाजपा के साथ नहीं जा सकती। अगर संभव होगा तो हम शिवसेना के साथ सरकार बनाएंगे या विपक्ष में बैठेंगे।

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