इस्लामिक स्टेट (आईएस) की स्टाइल में विदेशियों की हत्या की साजिश रचने वाले आतंकी मोहम्मद मोसिउद्दीन उर्फ मूसा को विशेष एनआईए कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। पश्चिम बंगाल की सीआईडी ने मूसा को जुलाई 2016 में बर्दवान में एक यात्री ट्रेन से गिरफ्तार किया था। बाद में इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने की थी।
मुख्य जज सिद्धार्थ कांजीलाल ने मूसा को उम्रकैद की सजा सुनाई। इससे पहले उसे भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और इसके लिए लोगों और हथियारों को जुटाने की साजिश का दोषी करार दिया गया था। एनआईए के वकील श्यामल घोष ने दावा किया था कि मूसा आईएस से प्रभावित आतंकी है और जानलेवा हमलों की साजिश रची। उन्होंने उसे उम्रकैद की सजा देने की अपील की थी।
एनआईए के आरोप पत्र के अनुसार, मूसा ने कोलकाता में मदर टेरेसा चैरिटी मिशनरी के मुख्यालय मदर हाउस का दौरा करने वाले विदेशी नागरिकों खासकर अमेरिका, रूस और ब्रिटेन से आने वाले लोगों की आईएस की स्टाइल में हत्या की साजिश रची थी। अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए उसने एक बड़ा चाकू भी खरीदा था।
एनआईए ने इसका सुबूत होने का भी दावा किया था। आरोप पत्र में कहा गया कि मूसा अमेरिका, रूस और ब्रिटेन के लोगों की हत्या करना चाहता था क्योंकि इन देशों ने सीरिया और लीबिया में आईएसआईएस पर बम बरसाए थे। मूसा की गिरफ्तारी के दौरान एक .38 बोर के छह चैंबर वाली रिवॉल्वर, तीन राउंड कारतूस, एक चाकू, एक मोबाइल फोन और अन्य आपत्तिजनक लेख मिले थे।
तमिलनाडु के तिरुप्पुर स्थित उसके घर से एक लैपटॉप और एक तलवार भी मिली थी। मूसा से आईएसआईएस से संबंधों को लेकर एफबीआई ने भी कोलकाता में पूछताछ की थी। मूसा पर दो बार जेल स्टाफ पर जानलेवा हमले का भी आरोप है। साथ ही उस पर वर्ष 2017 में अलीपुर सुधार गृह में चाकू से एक स्टाफ का गला काटने का आरोप है। वर्ष 2020 में उसने प्रेसीडेंसी सुधार गृह में वार्डर पर हमले का भी आरोप है।