गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार को हाईकोर्ट से 15 नवंबर तक के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। उन्हें 2022 के सांप्रदायिक दंगों के मामले में कथित तौर पर सबूत गढ़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतवाड़ को भी गिरफ्तार किया गया था। हालांकि सीतलवाड़ को 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई थी।
अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 25 जून को श्रीकुमार को गिरफ्तार किया था। तब सेवह पुलिस की हिरासत में थे। न्यायमूर्ति इलेश जे वोरा ने दस हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके के आधार पर 15 नवंबर तक के लिए अंतरिम जमानत को मंजूरी दी।
पूर्व डीजीपी के वकील ने हाईकोर्ट को उनकी उम्र का हवाला देते हुए राहत की मांग की थी। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि आवेदक संबंधित निचली अदालत के समक्ष एक नया आवेदन दाखिल करना चाहता है।
हाईकोर्ट कथित तौर पर सबूतों को गढ़ने के मामले में एक अन्य आरोपी तीस्ता सीतलवाड़ की नियमित जमानत याचिका पर भी सुनवाई कर रहा था। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत को एसआईटी द्वारा 21 सितंबर को दाखिल चार्जशीट के कागजात सीतलवाड़ के वकील को सौंपने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 15 नवंबर तय की है।
अदालत ने श्रीकुमार को जेल से रिहा होने के एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। उन्हें संबंधित अदालत में नई जमानत अर्जी दाखिल करने की भी छूट दी गई। वहीं लोक अभियोजक ने श्रीकुमार को राहत देने का विरोध किया और कहा कि कथित अपराध में उनकी भूमिका को देखते हुए अंतरिम जमानत देने का कोई मामला नहीं बनता है।
30 जुलाई को अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने सीतलवाड़ और श्रीकुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। 25 जून को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। एसआईटी ने 21 सितंबर को सीतलवाड़, श्रीकुमार और मामले के अन्य आरोपी पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।