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2000 साल पुराना है अयोध्या और दक्षिण कोरिया का रिश्ता, एक सपने से हुई थी शुरुआत 

Tue, 06 Nov 2018 05:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Ayodhya
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अयोध्या में दूसरे दीपोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। दीपोत्सव को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। इस मौके पर शिरकत करने के लिए दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेडी किमजोंग सुक पहले ही भारत आ चुकी हैं। बार-बार यही बात सामने आ रही है कि दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेडी को ही मुख्य अतिथि क्यों बनाया गया है। बता दें कि यह कनेक्शन आज का नहीं बल्कि 2000 साल पुराना है।     
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ये बात यहीं खत्म नहीं होती बल्कि इस कनेक्शन को और मजबूत बनाने के लिए कोरियाई सरकार अयोध्या में एक स्मारक भी बनाना चाहती है। ताकि यह रिश्ता और मजबूत हो जाए और उसे हमेशा याद रखा जा सके। दरअसल, अयोध्या से ताल्लुक रखने वाली दक्षिण कोरिया की रानी सूरीरत्न (हिव ह्वांग ओक) की याद में यह स्मारक बनाया जाएगा। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की पत्नी सूक रानी सूरीरत्न (हिव ह्वांग ओक) स्मारक के भूमि पूजन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी।
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2000 वर्ष पहले की थी यात्रा

बता दें कि राजकुमारी सूरीरत्न अयोध्या की ही थीं। उन्होंने करीब 2000 वर्ष पहले कोरिया की यात्रा की थी। जब वह वहां पहुंचीं तो उन्होंने वहां के नरेश किम सूरो से शादी कर ली थी। जिसके बाद उन्होंने अपना नाम भी बदल लिया था। उनका नाम बदलकर हिव ह्वांग ओक हो गया। जानकारी के मुताबिक राजकुमारी सूरीरत्न 48 ईस्वी में कोरिया गई थीं। तब उन्होंने एक स्थानीय राजा से शादी की और कराक राजवंश की स्थापना की।

दावा किया जा रहा है कि अयोध्या के राजा को स्वप्न में ईश्वर ने आदेश दिया कि वह अपनी 16 साल की राजकुमारी को दक्षिण कोरिया भेजें। ताकि दक्षिण कोरिया के शहर गिमहेई के राजा किम सूरो से उनकी शादी हो सके। खबरों के मुताबिक इसका उल्लेख चीनी भाषा की कुछ प्राचीन पुस्तकों में मिलता है। 

राजा किम सूरो और उनकी पत्नी सूरीरत्न के 10 बेटे हुए। राजा किम सूरो को ही इनका पूर्वज माना जाता है। किम वंश के लोगों की आबादी करीब 60 लाख है। यह दक्षिण कोरिया की कुल आबादी का 10 प्रतिशत है। इतिहासकारों का मानना है कि अयुता और अयोध्या एक ही नाम हैं। इसी वजह से कोरियाई सरकार अपनी रानी की याद में अयोध्या में एक स्मारक बनवाना चाहती है। 

बता दें कि इसके लिए साल 2000 में ही अयोध्या और गिमहेई को सिस्टर सिटीज के रूप में विकसित करने के लिए समझौता किया था। इसके बाद 2001 में अयोध्या में सरयू नदी के पश्चिमी तट पर महारानी हिव ह्वांग ओक के स्मारक का शिलान्यास किया गया था। इसी स्मारक को आगे बढ़ाने कि लिए और भूमि पूजन से जुड़े कार्यक्रम में शिरकत करने मुख्य अतिथि के रूप में भारत आई हैं। 
 
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