वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में बेहद अहम चिकित्सा उपकरण वेंटिलेटर की देश में कमी को लेकर खूब सवाल उठ रहे हैं। लेकिन, इसी बीच चेन्नई बंददरगाह पर विदेश से मंगाए गए 200 वेंटिलेटरों का साल 2018 से अटके होने का मामला सामने आया है। यहां पड़े इन वेंटिलेटर के साथ दिक्कत यह है कि ये सेकंड हैंड हैं अर्थात इनका इस्तेमाल किया जा चुका है।
पर्यावरण और वन मंत्रालय के कचरा प्रबंधन नियमों के मुताबिक इस्तेमाल किए जा चुके वेंटिलेटर और अन्य उपकरणों का आयात प्रतिबंधित है। भारत में ऐसी मशीनों को 'हानिकारक' श्रेणी में रखा जाता है। अमेरिका से मंगाए गए इन वेंटिलेटर को वापस भी नहीं किया जा सकता क्योंकि भारत सरकार ने कोरोना संकट को देखते हुए हर प्रकार के वेंटिलेटर के निर्यात पर रोक लगा दी है।
जानकारी के अनुसार, चेन्नई की कंपनी स्काईलार्क ऑफिस मशीन ने नवंबर 2018 में अमेरिका से इनका आयात किया था। सीमा शुल्क अधिकारियों ने इन वेंटिलेटर को जब्त कर कंपनी पर जुर्माना लगा दिया था। कंपनी सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवाकर अपीलीय न्यायाधिकरण के पास गई, जहां से कंपनी को इन्हें वापस अमेरिका निर्यात करने का आदेश दिया गया, जो कि फिलहाल संभव नहीं है।
अब कंपनी ने तमिलनाडु सरकार के उपक्रम 'तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन' को पत्र लिखकर कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में विशेष परिस्थितियों में इनका इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। कंपनी का कहना है कि वह इनका आयात पहले ही कर चुकी है और इन्हें विशेष श्रेणी के तहत नियमों में छूट दी जा सकती है।
कॉरपोरेशन ने 31 मार्च को इसे लेकर विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के चेन्नई कार्यालय से संपर्क कर इनके आयात को मंजूरी देने को कहा था। डीजीएफटी दिल्ली मुख्यालय ने पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद चार अप्रैल को इनके इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी। निदेशालय ने मुख्य सचिव व स्वास्थ्य सचिव को इन मशीनों को गुणवत्ता व सुरक्षा मानकों पर कस कर अस्पतालों में इनके उपयोग की संस्तुति देने का निर्देश दिया है।