नोट बंदी पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध फिलहाल खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे। इस मामले में जहां एकजुट विपक्ष ने अपना तेवर और कड़ा करते हुए बुधवार को धरना देने की घोषणा की है, वहीं सरकार ने भी साफ कर दिया है कि वह विपक्ष की एक भी मांग स्वीकार नहीं करेगी।
सरकार को घेरने के लिए सोमवार को कार्यवाही शुरू होने से पूर्व कांग्रेस, टीएमसी, बीएसपी, वाम दल, जदयू सहित कई दलों ने बैठक कर हमलावर रुख अपनाने की रणनीति बनाई। बैठक में विपक्ष के 200 सांसदों की ओर से बुधवार को धरना देने, नोट बंदी की सूचना कथित तौर पर लीक करने की जेपीसी से जांच कराने, लोकसभा में मत विभाजन वाले नियम के तहत चर्चा कराने और राज्यसभा में प्रधानमंत्री को बुलाने की मांग रखने की रणनीति बनी।
दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ चर्चा कर इस मुद्दे पर हमलावर रुख अपनाते रहने का निर्देश दिया। संसद भवन परिसर में कई विपक्षी दलों की बैठक करीब एक घंटे चली। बैठक में इस मुद्दे पर सरकार को सस्ते में न छोड़ने पर सहमति बनीँ। इन दलों की निगाहें बीते शनिवार को कुछ राज्यों में हुए लोकसभा और विधानसभा के उपचुनाव के नतीजों पर भी है। नतीजे मंगलवार को आने वाले हैं।