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'नई इमारत की कोई कीमत नहीं': नए संसद भवन के उद्घाटन पर विपक्ष ने जारी किया साझा बयान, बताई बहिष्कार की वजह

Wed, 24 May 2023 12:43 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

19 विपक्षी दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को ही छीन लिया गया है, तो हमें एक नए भवन की कोई कीमत नजर नहीं आती है।
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New Parliament of India - फोटो : Social Media
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विस्तार
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देश के नए संसद भवन का इसी महीने 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन होना है। लेकिन उससे पहले ही सियासी घमासान शुरू हो गया है। बुधवार को 19 विपक्षी दलों ने इसका बहिष्कार करने के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को ही छीन लिया गया है, तो हमें एक नई इमारत की कोई कीमत नजर नहीं आती है।

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विपक्षी दलों ने संयुक्त बयान में कहा, नए संसद भवन का उद्घाटन एक यादगार अवसर है। हमारे इस भरोसे के बावजूद कि यह सरकार लोकतंत्र के लिए खतरा है और जिस निरंकुश तरीके से नई संसद का निर्माण किया गया था, उसके प्रति हमारी अस्वीकृति के बावजूद हम मतभेदों को दूर करने के लिए इस अवसर पर शामिल होने के लिए खुले थे। लेकिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए नए संसद भवन का उद्घाटन खुद ही करने का प्रधानमंत्री मोदी का फैसला न केवल उनका अपमान है, बल्कि हमारे लोकतंत्र पर सीधा हमला है। 

इसमें आगे कहा गया है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 79 में कहा गया है कि संघ के लिए एक संसद होगी जिसमें राष्ट्रपति और दो सदन शामिल होंगे जिन्हें क्रमशः राज्यसभा और लोकसभा के रूप में जाना जाएगा। राष्ट्रपति न केवल भारत में राष्ट्र प्रमुख है, बल्कि संसद के एक अभिन्न अंग भी है। बयान में आगे कहा गया, संसद उनके (राष्ट्रपति) बिना काम नहीं कर सकती। यह अमर्यादित कृत्य संसद के उच्च पद का अपमान करता है, और संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता है। यह समावेश की भावना को कमजोर करता है।
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साझा बयान में आगे कहा गया है कि अलोकतांत्रिक कृत्य प्रधानमंत्री के लिए नए नहीं हैं, जिन्होंने संसद को लगातार खोखला किया है। भारत के लोगों के मुद्दों को उठाने पर संसद के विपक्षी सदस्यों को अयोग्य घोषित, निलंबित और मौन कर दिया गया है। सांसदों की बेंच ने संसद को बाधित कर दिया। तीन कृषि कानूनों सहित कई विवादास्पद कानूनों को लगभग बिना किसी बहस के पारित किया गया, और संसद की समितियों को आंशिक रूप से निष्क्रिय कर दिया गया। नया संसद भवन सदी में एक बार आने वाली महामारी के दौरान बड़े खर्च पर बनाया गया है, जिसमें भारत के लोगों या सांसदों के साथ कोई परामर्श नहीं किया गया है, जिनके लिए यह स्पष्ट रूप से बनाया जा रहा है। 


जिन पार्टियों ने यह साझा बयान जारी किया है उनमें कांग्रेस, द्रमुक, आप, शिवसेना (यूबीटी), समाजवादी पार्टी, भाकपा, झारखंड मुक्ति मोर्चा, केरल कांग्रेस (मणि), विदुथलाई चिरुथैगल काची, राष्ट्रीय लोकदल, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल (यूनाइटेड), भाकपा (मार्क्सवादी), राष्ट्रीय जनता दल, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, एमडीएमके शामिल हैं। 

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