कुछ व्यक्तियों के समूह ने लाखों लोगों के साथ ठगी करने का एक नया तरीका खोजा। वे इसमें काफी हद तक कामयाब भी हो गए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद जोनल कार्यालय की जांच में सामने आया है कि एग्री गोल्ड ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े लोगों ने उच्च रिटर्न या आवासीय भूखंड के वादे के साथ रियल एस्टेट में निवेश करने के नाम पर लगभग 19 लाख ग्राहकों और 32 लाख खाताधारकों से राशि एकत्र कर ली। लोगों को यह शक न हो कि उनके साथ फर्जीवाड़ा हो रहा है, एग्री गोल्ड ग्रुप ने रियल एस्टेट कारोबार की आड़ में फर्जी सामूहिक निवेश योजना चलाई। इसके लिए 130 से अधिक कंपनियां खड़ी कर दी गईं। ये कंपनियां, जमाकर्ताओं से 'भूखंडों' के नाम पर पैसा एकत्रित करती थी। अब प्रवर्तन निदेशालय ने ऐसी ही कई कंपनियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है।
इन कंपनियों के ख़िलाफ हुई कार्रवाई
ईडी ने एग्री गोल्ड ग्रुप ऑफ कंपनीज के मामले में मेसर्स एग्री गोल्ड एक्ज़िम्स लिमिटेड, मेसर्स अमृतवर्षिनी डेयरी फार्म प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अव्वास इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स मथांगी इंफ्रा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स शक्ति टिम्बर एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, अव्वा सीता राम राव, अव्वा वेंकट सुब्रमण्येश्वर सरमा और मेसर्स सैंक्चुअरी होम्स प्राइवेट के खिलाफ हैदराबाद के विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत खिलाफ एक पूरक अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। विशेष न्यायालय ने 6 नवंबर को पीसी का संज्ञान लिया है।
कई राज्यों में फैले थे तार
ईडी ने एग्री गोल्ड समूह की कंपनियों के खिलाफ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा और अंडमान और निकोबार सहित कई राज्यों के पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। ये एफआईआर एग्री गोल्ड समूह की कंपनियों के खिलाफ जमाकर्ताओं की कई शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई थी। इस समूह से जुड़ी कंपनियों ने उच्च रिटर्न या आवासीय भूखंड के वादे के साथ रियल एस्टेट निवेश के नाम पर लगभग 19 लाख ग्राहकों और 32 लाख खाताधारकों से जमा राशि एकत्र की थी। ईडी की जांच में पता चला कि एग्री गोल्ड ग्रुप ने रियल एस्टेट कारोबार की आड़ में फर्जी सामूहिक निवेश योजना चलाई, जिसके लिए 130 से अधिक कंपनियां बनाई गईं। ये कंपनियां जमाकर्ताओं से 'भूखंडों के लिए अग्रिम' के रूप में जमा राशि एकत्र करती थीं।
बोनस के साथ पूरा पैसा वापस देने की बात
उक्त कंपनियों के पास समनुरूप भूमि उपलब्ध न होने पर, प्लॉट संख्या, सर्वेक्षण संख्या और भूमि का स्थान निर्दिष्ट किए बिना और किसी अन्य उद्यम में भूखंडों की पेशकश करने का अधिकार सुरक्षित था। विज्ञापन में कहा गया कि यदि प्रस्तावित उद्यम में भूखंड उपलब्ध नहीं है या ग्राहक एग्री गोल्ड ग्रुप द्वारा प्रस्तावित प्लॉट खरीदने में रुचि नहीं रखता है, तो कुछ बोनस के साथ उनका पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा। इस व्यवसाय मॉड्यूल का पालन कर, अव्वा वेंकट राम राव और अन्य निदेशकों के नेतृत्व में एग्री गोल्ड ग्रुप ने लाखों भोले-भाले व्यक्तियों को लालच दिया।
6380 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद
लोगों को लालच देकर उनकी जमा राशि प्राप्त कर ली। इसके बाद इन फंडों को जमाकर्ताओं की जानकारी के बिना बिजली/ऊर्जा, डेयरी, मनोरंजन, स्वास्थ्य (आयुर्वेदिक), फार्म लैंड वेंचर्स इत्यादि जैसे विभिन्न उद्योगों में लगा दिया गया। ये कंपनियां, तय सहमति के अनुसार, लोगों की जमा राशि को नकद या वस्तु के रूप में वापस करने में चूक गईं। लोगों को लुभाने के लिए एग्री गोल्ड समूह ने हजारों कमीशन एजेंटों को काम पर लगाया। वे रुपये इकट्ठा करने में कामयाब रहे। जांच के दौरान 32 लाख से अधिक निवेशक खातों से 6380 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद हुई। ईडी ने 4141.33 करोड़ रुपये अटैच किए थे।
चार साल पहले हुई थी गिरफ़्तारी
ईडी ने अव्वा वेंकट राम राव, अव्वा वेंकट शेषु नारायण राव और अव्वा हेमा सुंदर वर प्रसाद को दिसंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। अव्वा वेंकट राम राव, अव्वा वेंकट शेषु नारायण राव, अव्वा हेमा सुंदर वर प्रसाद, मेसर्स एग्रीगोल्ड फार्म एस्टेट्स इंडिया प्रा. लिमिटेड और एग्री गोल्ड कंस्ट्रक्शन प्रा. लिमिटेड सहित 14 आरोपी व्यक्तियों / संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की गई। पहले आरोप पत्र फरवरी 2021 में विशेष न्यायालय (पीएमएलए), हैदराबाद के समक्ष दायर किया गया था और इसका संज्ञान 28.09.2023 को लिया गया था।