विदेश में कमाई करने के नाम पर पूर्वी यूपी के चार जिलों के 19 लोग ठगे गए हैं। जालसाज एजेंट ने सब्जबाग दिखाकर इनसे मोटी रकम वसूली और इन्हें सऊदी अरब भिजवा दिया। भवन निर्माण से जुड़े ये कारीगर और मजदूर चार माह पहले घर से चले तो इसी काम के लिए थे, लेकिन उनसे वहां 14 घंटे तक खेतों में काम कराया जा रहा है। अभी तक वेतन तो नहीं मिला, लेकिन अब भोजन भी मुश्किल से दिया जा रहा है। इनको गुलामों की तरह रखा जा रहा है। अब ये लोग स्वदेश वापसी के लिए छटपटा रहे हैं। इन्होंने अमर उजाला को फोन कर अपनी दास्तां बयां की।
कौशांबी जिले की भरवारी तहसील के गांव टीकरडीह निवासी मक्खन लाल सऊदी अरब में गुलामों जैसे हालात में फंसे 19 लोगों में से एक हैं। उन्होंने फोन पर अमर उजाला को बताया कि इनमें उनके जिले के अलावा प्रतापगढ़, आजमगढ़ और जौनपुर समेत अन्य जिलों के लोग भी शामिल हैं। पेशे से भवन निर्माण मिस्त्री मक्खन लाल ने बताया कि उनकी मुलाकात कौशांबी के सिराथू निवासी शमीम नामक एजेंट से हुई थी। उसने बताया था कि वहां नौ घंटे यही काम करके वह अच्छी कमाई कर सकेंगे। किराया, वीजा-पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज के लिए उसने उनसे 79 हजार रुपये वसूले। फिर उन्हें मुंबई के ग्रांड रोड स्थित आसमां ट्रेवल्स भेजा।
उन्होंने बताया कि उन्हें वहां हायल के निजम्मा के पास रखा गया है। उनसे चार के बदले 14 घंटे काम कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, वेतन देने में भी आनाकानी की जा रही है। अब तो भोजन के भी लाले पड़ रहे हैं। मक्खन लाल ने बताया कि कई लोगों से एजेंटों ने 90-90 हजार रुपये भी लिए हैं। उन्हें नहीं पता कि इस हाल में वह वतन वापसी के लिए किससे मदद मांगें। उनकी उम्मीद अब भारत के विदेश मंत्रालय से है।
ये भी फंसे हैं वहां
मैनूसीन अली (महाराजगंज), शम्स तबरेज व मेहंदी हसन (कुशीनगर), ओमप्रकाश, अनेश कुमार व उमेश कुमार (कौशाम्बी), मुकेश यादव, संतोष यादव व जवाहिर यादव (गाजीपुर), रुआब, कुरेश अहमद व कैसर अली (सिद्धार्थनगर), विजय कुमार (प्रतापगढ़), जुबेर अहमद (आजमगढ़), श्याम बाबू (बरेली), कमाल हुसैन (असम), अब्दुल मलिक व जाफर (कोलकाता)।