बिना अधिकार के छापा मारने और नकदी जब्त करने के मामले में आयकर विभाग कानपुर पर हाईकोर्ट ने 25 हजार रुपये का हर्जाना लगा दिया है। विभाग को जब्त की गई राशि ब्याज सहित लौटाने का भी निर्देश दिया है। ब्याज की राशि 2001 से वसूली जाएगी। कोर्ट ने अवैध छापे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से इस राशि की वसूली करने की आयकर विभाग को छूट दी है।
बीघापुर उन्नाव की देवी की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति डा. केजे ठाकर की पीठ ने यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया कि एक मई 2001 को याची के घर पर आयकर विभाग की टीम ने छापा मारा। छापे में कई एफडीआर और पंजाब नेशनल बैंक के खाते में नकद राशि विभाग ने जब्त कर ली। याची के पति बहरीन में नौकरी करते हैं। याची ने जब्ती के खिलाफ आयकर आयुक्त के यहां अपील की। 2008 में आयुक्त ने जब्ती की कार्रवाई को गलत करार दिया।
आयकर विभाग ने इस आदेश के खिलाफ न्यायाधिकरण में अपील की जो खारिज हो गई। इसके बावजूद न तो उसकी नकद राशि लौटाई गई और न एफडीआर लौटाया गया। हाईकोर्ट ने आयकर विभाग को निर्देश दिया है कि जब्ती की तारीख से भुगतान की तिथि तक 18 फीसदी ब्याज के साथ धनराशि वापस की जाए। निर्दोष याची का उत्पीड़न करने पर विभाग पर 25 हजार रुपये हर्जाना लगाया है।