ऐसे लोकसभा में पहुंचीं ये महिलाएं
इनमें से मोसीना किदवई एक बड़ी नेता बनीं और कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। जबकि कैसर जहां, जो एक चायवाले की पत्नी थीं, को 2009 में बसपा प्रमुख मायावती ने टिकट दिया और उन्होंने चुनाव जीता। आबिदा अहमद, देश के पांचवें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की पत्नी थीं, जो चुनाव जीतने वाली पहली और इकलौती प्रथम महिला बनीं। नूर बानो, रामपुर की रानी, ने 1996 और 1999 में चुनाव जीते, लेकिन जया प्रदा के साथ मुकाबले में हार गईं। बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहां ने भी 2019 में तृणमूल कांग्रेस से चुनाव जीतकर कई परंपराएं तोड़ीं।
यह भी पढ़ें -
DGCA: एयरफोर्स के हवाई अड्डों पर अब विमान की खिड़कियां बंद करने की जरूरत नहीं होगी, डीजीसीए का निर्देश
वर्तमान में केवल एक मुस्लिम महिला सांसद
वर्तमान 18वीं लोकसभा में सिर्फ एक मुस्लिम महिला सांसद हैं- इकरा हसन चौधरी। वे समाजवादी पार्टी से चुनी गई हैं और उन्होंने भाजपा के एक वरिष्ठ नेता को हराकर सुर्खियां बटोरीं। वे लंदन से पढ़ी हुईं, युवा और प्रभावशाली नेता के रूप में उभर रही हैं।
कांग्रेस नेता शशि थरूर की टिप्पणी
किताब की भूमिका में कांग्रेस सांसद शशि थरूर लिखा हैं- 'आजादी के 78 साल बाद भी हम अपने लोकतंत्र पर गर्व तो करते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि हमने महिलाओं, खासकर मुस्लिम महिलाओं को कभी बराबरी नहीं दी।' उन्होंने कहा कि मीडिया और समाज की चुप्पी ने इस सच्चाई को हमेशा छुपा कर रखा है।