75 साल पुराने पत्र ने खोला ऐसा रहस्य, इस देश में मिला बेहद दुर्लभ खजाना
- फोटो : X@Geology_History
75 year old letter mineral discovery: कभी-कभी कुछ ऐसा होता है, जिससे पुराने रहस्य का खुलासा हो जाता है। अब एक ऐसी ही घटना सामने आई है, जिसके बारे में जानकर आपके लिए यकीन करना मुश्किल होगा। दरअसल, जर्मनी के बवेरिया में साल 2023 में सरकारी दस्तावेजों की डिजिटलीकरण प्रक्रिया के दौरान एक 75 साल पुराना पत्र मिला। साल 1949 में इस पत्र को लिखा गया था, जिसमें एक जूते के डिब्बे का जिक्र किया गया था। इसमें पीले रंग के चमकदार टुकड़े रखे थे। इस पत्र ने वैज्ञानिकों को हम्बोल्टाइन तक पहुंचा दिया। यह एक बेहद दुर्लभ खनिज है और दुनिया में अभी तक सिर्फ 30 जगहों पर मौजूद है।
हम्बोल्टाइन क्या है?
हम्बोल्टाइन एक ऑर्गेनिक मिनरल है। यह एक ऐसा है खनिज जिसमें कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन जैसे तत्व धातु के साथ क्रिस्टल संरचना में बंधे रहते हैं। इसकी रासायनिक संरचना में आयरन और ऑक्सालेट होता है। यह एक पीले रंग का नरम, रेजिन जैसे चमक वाला खनिज बनता है। प्राकृतिक रूप से यह खनिज तब बनता है, जब आयरन युक्त चट्टानों का कुछ खास एसिडिक वातावरण में नम स्थितियों में संपर्क होता है। इसकी बनावट को ही एक भूवैज्ञानिक चमत्कार माना जाता है।
इस खोज के प्रमुख बवेरिया स्टेट ऑफिस फॉर द एनवायरनमेंट के वैज्ञानिक रोलैंड आइशहॉर्न हैं। उनकी टीम ने डिब्बे में रखे पीले टुकड़ों की पुष्टि की, तो यह साफ हो गया कि यह हम्बोल्टाइन है। इस खोज से जर्मनी में इस दुर्लभ खनिज का स्टॉक एक पल में दोगुना हो गय। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार मिले हम्बोल्टाइन के टुकड़े हेजलनट जितने बड़े हैं। यह खनिज भूरे कोयले (ब्राउन कोल) की परतों में कैसे बने। यह अभी भी एक रहस्य है।
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दुनिया में जगा दी रुचि
इस खोज से भूगोल के साथ ही तकनीक की दुनिया में भी रुचि जगा दी है। हम्बोल्टाइन की इलेक्ट्रॉन शटलिंग क्षमता से भविष्य की ग्रीन टेक्नोलॉजी...खासकर सुरक्षित, हाई-कैपेसिटी लिथियम-आयन बैटरी कैथोड के लिए उपयुक्त बन सकती है।