भारत में बिना हेलमेट के मोटरसाइकिल चलाना आजकल का फैशन बन गया है, जिसकी वजह से हर साल सड़क हादसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में बिना हेलमेट के मोटरसाइकिल चलाने वाले कम से कम 98 लोग रोजाना मारे गए, जबकि बिना सीट बेल्ट लगाए कार चलाने वाले 79 लोग हर दिन मौत के मुंह में समा गए।
गाड़ी चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल भी बहुत खतरनाक होता है। इसकी वजह से भी पिछले साल करीब 9 लोग प्रति दिन मारे गए हैं।
राज्य पुलिस और परिवहन विभागों द्वारा दिए गए आंकड़ों के आधार पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने ये रिपोर्ट जारी की है। हालांकि, 2016 के आंकड़ों को देखें तो 2017 में सड़क हादसों में हुई मौतों की संख्या में थोड़ी कमी जरूर आई है। 2016 में सड़क हादसों में करीब 1.51 लाख लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2017 में यह घटकर 1.48 लाख हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेफ्टी गियर या उपकरणों का उपयोग करने में विफलता के कारण सड़क हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। 2017 में सड़क हादसे के दौरान हेलमेट न होने के कारण करीब 36,000 लोगों की मौत हुई है, जबकि 2016 में ये आंकड़ा 10,135 था।
बिना हेलमेट गाड़ी चलाने के कारण तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मौतें
इस मामले में तमिलनाडु सबसे आगे है। यहां हेलमेट न होने के कारण सड़क हादसों में 5,211 लोगों की मौत हुई है, जबकि इस तरह के हादसों के मामले में उत्तर प्रदेश (4,406) दूसरे पायदान पर और तीसरे पायदान पर मध्य प्रदेश (3,183) है।
सीट बेल्ट न लगाने के कारण कर्नाटक में सबसे ज्यादा मौतें
सीट बेल्ट न लगाने के कारण हुई मौतों के मामलों में कर्नाटक पहले स्थान पर है। यहां इसके कारण 4,035 लोगों की मौत हुई है, जबकि इस मामले में दूसरे पायदान पर तमिलनाडु (3,497) और उत्तर प्रदेश (2,897) तीसरे स्थान पर है।