वहीं, जिन 15 एसी ट्रेनों को चलाने की शुरुआत हुई है, इनमें कोई भी यात्री ऑनलाइन टिकट बुकिंग कर यात्रा कर सकेगा। इनका किराया राजधानी स्तर का हो सकता है, जिनकी पूरी जानकारी आईआरसीटीसी की वेबसाइट से मिल सकती है।
इन ट्रेनों में खानपान की कोई व्यवस्था नहीं होगी। सीमित पैकेट बंद खाने की उपलब्ध खाद्यपदार्थों की व्यवस्था ऑन डिमांड सेवा पर उपलब्ध रहेगी।
सामान्य लोगों के लिए केवल एसी ट्रेनों को चलाने पर कई संगठनों के विरोध के स्वर भी सामने आने लगे हैं। दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा है कि सरकार केवल एसी ट्रेन चलाकर यह साबित करती है कि वह सामान्य लोगों के हित में नहीं, बल्कि केवल अमीरों के लिए काम कर रही है।
एसी ट्रेनों की तरह उसे सामान्य लोगों के लिए सामान्य स्लीपर ट्रेनों को चलाने पर भी विचार करना चाहिए। इनका किराया आम आदमी की पहुंच में होगा।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री वीके बंसल ने कहा कि सरकार एक तरफ मजदूरों को उनके घर भेजने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर उद्योगों को चलाने की कोशिश कर रही है।
लेकिन अगर मजदूर एक बार में अपने घरों को चले जाएंगे तो इनके जल्दी दुबारा लौटने की संभावना बहुत कम रहेगी। ऐसी स्थिति में उद्योगों को दुबारा पटरी पर लाने की कोशिश को चोट लग सकती है।
फेडरेशन ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर खुदरा क्षेत्र की समस्याओं से भी अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि लगभग 33 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले इस क्षेत्र के लिए भी सरकार को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की तर्ज पर मदद करने पर विचार करना चाहिए।