तमिलनाडु के तीन सरकारी अस्पतालों में खराब खून चढ़ाने के कारण करीब 15 गर्भवती महिलाओं की मौत हो गई है। ये मौत बीते चार महीने में हुई हैं। प्राथमिक जांच में पता चला है कि खून को अनुचित तापमान में संग्रहित करके रखा गया था। हालांकि कई डॉक्टरों ने खून को सुरक्षित बताया।
धर्मपुरी, होसुर और कृष्णागिरी सरकारी अस्पतालों में खून का निरीक्षण करने वाले वरिष्ठ डॉक्टर और अधिकारियों को पता चला कि खराब खून चढ़ाने के कारण गर्भवती महिलाओं और माताओं की मौत हुई है।
पहचान ना बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, "कई मामलों में खून चढ़ाने के कुछ मिनट बाद ही महिलाओं को उसके बुरे प्रभावों का सामना करना पड़ा है।"
राज्य की स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश ने ब्लड बैंक के अफसरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ अनुशासनात्मक कार्रवाही के भी आदेश दिए हैं।
डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन को लिखे अपने खत में स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि लापरवाही करने वाले अफसरों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। इस मामले में नर्स और लैब टेक्नीशियन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा।
इससे पहले भी सरकारी अस्पतालों की खून चढ़ाने के दौरान लापरवाही सामने आ चुकी है। नवंबर माह में एक गर्भवती महिला को एचआईवी से संक्रमित खून चढ़ा दिया गया था। ब्लड मैनेजन ने खून को सुरक्षित बताया था।
इस मामले में पता चला था कि करीब दो साल पहले जब एक व्यक्ति ने रक्त दान किया था तब उसके खून में एचआईवी के संक्रमण पाए गए थे। उसे हेपेटाइटिस-बी भी था। ये जांच सरकारी अस्पताल की लैब में की गई। हालांकि उसे इस बारे में व्यक्ति को कुछ नहीं बताया गया।
अधिकारियों ने बताया कि बीते महीने भी व्यक्ति ने सरकारी बल्ड बैंक में रक्त दान किया था। जब तक एचआईवी संक्रमण के बारे में कुछ पता चलता तब तक महिला को खून चढ़ाया जा चुका था।